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पर्यावरण का संरक्षण केवल एक दिन का कर्तव्य नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली का हिस्सा होना चाहिए-अनुज

विश्व पर्यावरण दिवस पर कुंवरगढ़ में भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम संपन्न,विधायक अनुज शर्मा ने किया वृक्षारोपण

विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर नगर कुंवरगढ़ में प्रकृति के संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान नगर के वार्ड क्रमांक – 06 स्थित ऐतिहासिक खादी ग्रामोद्योग भवन (गांधी घर) एवं स्थानीय “फिल्टर प्लांट” परिसर में पूरे उत्साह के साथ पौधे रोपण किए गए।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्रीय लोकप्रिय विधायक अनुज शर्मा जी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने पर्यावरण संतुलन के लिए वृक्षों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आम जनमानस से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की शुरुआत वार्ड क्रमांक – 06 के खादी ग्रामोद्योग भवन (गांधी घर) से हुई, जहाँ अतिथियों ने बापू के विचारों को याद करते हुए प्रकृति की सेवा का संकल्प लिया और औषधीय व छायादार पौधे लगाए। इसके पश्चात सभी जनप्रतिनिधियों ने “फिल्टर प्लांट” परिसर का रुख किया, जहाँ जल स्रोतों के आसपास हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से सघन वृक्षारोपण किया गया।
इस अवसर पर विधायक अनुज शर्मा नें कहा कि आज हम सब यहाँ ‘पर्यावरण दिवस’ मनाने के लिए इकट्ठा हुए हैं।पर्यावरण कोई एक दिन का उत्सव नहीं है, यह हमारी हर सांस का उत्सव होना चाहिए। हमारी छत्तीसगढ़िया संस्कृति में तो सदियों से सिखाया गया है—’परिवेश ही परमेश्वर है’। हम तो पेड़, नदी, पहाड़ और माटी को पूजने वाले लोग हैं। फिर आज ऐसा क्या हो गया कि हमें अपने अस्तित्व को बचाने के लिए एक ‘दिवस’ का सहारा लेना पड़ रहा है।वक्त आ गया है कि हम सिर्फ किताबों में पर्यावरण न पढ़ें, बल्कि अपनी जिम्मेदारी को जमीन पर उतारें। क्रांति हमेशा युवाओं के कंधों पर सवार होकर आती है। अगर आज छत्तीसगढ़ के युवा ठान लें, तो इस राज्य की हरियाली को कोई नहीं छीन सकता। आप लोग मोबाइल के ‘स्क्रीन टाइम’ को तो अच्छे से जानते हैं, थोड़ा समय ‘ग्रीन टाइम’ को भी दीजिए। हर युवा अगर अपने जीवन के हर खास मौके पर—चाहे वह आपका जन्मदिन हो, या परीक्षा में सफलता का दिन—एक पौधा लगाए और उसकी जिम्मेदारी ले, तो यकीन मानिए, हमें किसी ग्लोबल वार्मिंग से डरने की जरूरत नहीं होगी।हमारा छत्तीसगढ़ ‘धान का कटोरा’ कहलाता है। यहाँ की माटी इतनी उपजाऊ है कि यहाँ जो बोओगे, वह सोना बनकर उगेगा। लेकिन इस सोने को बचाने की जिम्मेदारी सभीं ग्रामवासियों की है।प्रकृति हमें सब कुछ मुफ्त में देती है—हवा, पानी, धूप। लेकिन अगर हम इसके साथ खिलवाड़ करेंगे, तो इसकी कीमत हमारी आने वाली पीढ़ियों को चुकानी पड़ेगी। छत्तीसगढ़ी में एक कहावत है—”जइसन बोबो, तइसन लुहबो” (जैसा बोओगे, वैसा काटोगे)। आज अगर हम पौधे बोएंगे, तभी कल हमारे बच्चों को शुद्ध हवा और छांव मिलेगी।आइए, आज इस पर्यावरण दिवस पर हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि हम अपनी धरती को हरा-भरा बनाएंगे और छत्तीसगढ़ की इस पावन धरा की हरियाली को अक्षुण्ण रखेंगे।
इस गरिमामयी आयोजन में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई, जिनमें मुख्य रूप से विधायक अनुज शर्मा ,खादी बोर्ड अध्यक्ष राकेश पाण्डेय, ,जनपद अध्यक्ष शकुंतला ढिलेंद सेन , नगर अध्यक्ष गोविंद साहू ,मण्डल अध्यक्ष राकेश यादव शामिल रहें।

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