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छत्तीसगढ़

प्लास्टिक कचरे पर जनहित याचिका, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

रायपुर। हाइकोर्ट में प्लास्टिक प्रदूषण और सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर बुधवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल को कई कड़े निर्देश जारी किए। यह जनहित याचिका पर्यावरणविद नितिन सिंघवी की ओर से दायर की गई है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार और छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल को पूरे प्रदेश में प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ व्यापक जागरूकता और जनसंवेदनशीलता अभियान चलाना होगा। कोर्ट ने निर्देश दिया कि प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया, शैक्षणिक संस्थानों, स्थानीय निकायों और सार्वजनिक घोषणाओं के माध्यम से लोगों को प्लास्टिक कचरे के दुष्प्रभावों और सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर लगे प्रतिबंध की जानकारी दी जाए।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य सरकार लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने और जिम्मेदार नागरिक व्यवहार विकसित करने की दिशा में प्रभावी प्रयास करे। अदालत ने स्पष्ट किया कि नागरिकों में स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और प्लास्टिक प्रदूषण कम करने के प्रति सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने की जरूरत है।

पर्यावरणविद नितिन सिंघवी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार और पर्यावरण संरक्षण मंडल पूरे प्रदेश में व्यापक स्वच्छता और प्लास्टिक कचरा हटाने का अभियान चलाएं।

हाईकोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक सड़कें, बाजार क्षेत्र, नाले, जल स्रोत, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, गांव और अन्य सार्वजनिक स्थलों को प्लास्टिक कचरे और सिंगल यूज प्लास्टिक सामग्री से यथासंभव मुक्त किया जाए। अदालत ने माना कि प्लास्टिक प्रदूषण अब केवल पर्यावरण का नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता का भी गंभीर मुद्दा बन चुका है।

राज्य सरकार की तरफ से एडिश्नल एडवोकेट जनरल शशांक ठाकुर ने पैरवी की। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया, शैक्षणिक संस्थानों, स्थानीय निकायों और सार्वजनिक घोषणाओं के माध्यम से लोगों को प्लास्टिक कचरे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जाए।

कोर्ट ने कहा कि लोगों में जिम्मेदार नागरिक व्यवहार और पर्यावरण चेतना विकसित करना जरूरी है। इसके साथ ही कपड़े, कागज और जूट जैसे पर्यावरण अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिए गए हैं।

हाईकोर्ट ने प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक के निर्माण, परिवहन और सप्लाई से जुड़े नेटवर्क की पहचान कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने को भी कहा है। अदालत ने माना कि प्रदेश में प्रतिबंध के बावजूद सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग जारी है, जिससे पर्यावरण और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

कोर्ट ने राज्य सरकार से इस संबंध में विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी है। मुख्य सचिव को निर्देश दिया गया है कि अगली सुनवाई से पहले यह बताया जाए कि कोर्ट के निर्देशों के पालन में क्या-क्या कदम उठाए गए हैं।

मामले की अगली सुनवाई 8 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद प्लास्टिक प्रदूषण रोकने के लिए किस स्तर पर कार्रवाई करती है।

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