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सुप्रीम कोर्ट ने डॉग लवर्स की याचिका की खारिज, पूरे देश में सार्वजनिक जगहों से हटाए जाएंगे आवारा कुत्ते, अपना पुराना आदेश बरकरार रखा

नई दिल्ली। आवारा कुत्तों पर देश के शीर्ष न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने सुप्रीम फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों पर डॉग लवर्स और एनजीओ की याचिकाओं को सभी खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि  सार्वजनिक संस्थानों के परिसरों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश नहीं बदलेगा। आवारा कुत्तों पर पुराना आदेश (2025 का) ही लागू रहेगा। इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने बीमार और खतरनाक कुत्तों को मारने पर भी विचार करने को कहा है। शीर्ष न्य़ायालय ने कहा कि खतरनाक और बीमार कुत्तों को इंजेक्शन लगाकर मारा जा सकता है। लोगों की जान की सुरक्षा बेहद जरूरी है। जो अफसर निर्देश न माने, उस पर अवमानना का केस चलाया जाए।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद आवारा कुत्तों पर फिलहाल सुनवाई बंद कर दी गई है। कोर्ट ने कहा है कि वह 17 नवंबर को हर राज्य की कंप्लायंस रिपोर्ट देखेगा। सुनवाई के दौरान आवारा कुत्तों के मामले में नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से कहा कि उसके फैसले का सही से पालन नहीं किया गया। इसे वह कोर्ट की अवमानना के तौर पर देखता है।

जस्टिस विक्रमनाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि बच्चों, बुजुर्गों को कुत्ते काट रहे हैं। हम ऐसी स्थिति से आंखें नहीं मूंद सकते। उन्होंने कहा कि एनिमल वेलफेयर बोर्ड के SOP के खिलाफ सभी आवेदन हम खारिज कर रहे हैं। अदालत ने आवारा कुत्तों के पुनर्वास और नसबंदी को लेकर पहले दिए गए निर्देशों को वापस लेने की मांग वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। बेंच ने कहा कि राज्यों को एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स का पालन करना चाहिए था। तब ऐसी स्थिति नहीं बनती। सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और इकोलॉजिकल बैलेंस का मामला है। देश के शीर्ष न्यायालय ने कहा कि हमारे 7 नवंबर, 2025 के आदेश का राज्यों ने सही से पालन नहीं किया। इसे अवमानना की तरह देखा जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कुछ अहम निर्देशः-

राज्य और केंद्र शासित क्षेत्र ABC फ्रेमवर्क का पालन करें।

हर शहर में इसके लिए सेंटर हो।

कर्मचारियों को उचित ट्रेनिंग दी जाए।

एंटी रैबीज वैक्सीन उपलब्ध करवाई जाए।

NHAI हाई वे से आवारा मवेशियों को हटाने के लिए कदम उठाए।

गौशाला बनाई जाए. इन्हें वहां भेजा जाए।

गंभीर रूप से बीमार और खतरनाक कुत्तों को मारने पर विचार हो।

हमारे आदेशों के पालन में कदम उठा रहे अधिकारियों को उनका काम करने दिया जाए. उनके खिलाफ कोई अदालत अपरिहार्य स्थिति में ही सुनवाई करे।

नवंबर 2025 में SC ने दिया था ये आदेश

नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और नेशनल हाईवे अथॉरिटी को निर्देश दिया था कि वे सार्वजनिक जगहों जैसे अस्पताल, पार्क, रेलवे स्टेशन जैसी सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाकर उन्हें शेल्टर होम भेजें। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि इन कुत्तों को एक बार नसबंदी हो जाने के बाद वापस उन्हीं इलाकों में नहीं छोड़ा जा सकता, जहां वो मिले थे। जस्टिस जेबी परदीवाला और आर महादेवन की बेंच ने दिल्ली-एनसीआर के अधिकारियों को आदेश दिया कि वे सड़कों से आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम में भेजें। इस काम में रुकावट डालने वालों पर अदालती कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी।

कोर्ट ने पिछले साल स्वतः संज्ञान लिया था

मामला 28 जुलाई 2025 को शुरू हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने देश में आवारा कुत्तों के हमलों और उनसे होने वाली मौतों पर स्वतः संज्ञान लिया था। 11 अगस्त 2025 को कोर्ट ने दिल्ली-NCR से 8 हफ्ते के भीतर सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम में भेजने का आदेश दिया था।इसके खिलाफ विरोध होने पर 22 अगस्त 2025 को कोर्ट ने अपने आदेश में बदलाव किया। कोर्ट ने कहा कि जिन कुत्तों में रेबीज नहीं है और जो आक्रामक नहीं हैं, उन्हें नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी इलाके में छोड़ा जा सकता है, जहां से पकड़ा गया था। बाद में मामले का दायरा पूरे देश तक बढ़ा दिया था।

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