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छत्तीसगढ़

शिक्षक भर्ती विवाद में हाईकोर्ट से महिला अभ्यर्थी को राहत, अवमानना याचिका निरस्त

बिलासपुर। शिक्षक भर्ती से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महिला अभ्यर्थी को बड़ी राहत दी है। अदालत ने दायर अवमानना याचिका को यह कहते हुए निराकृत कर दिया कि उसके पूर्व आदेश का राज्य सरकार द्वारा पालन कर लिया गया है, क्योंकि संबंधित अभ्यर्थी की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। ऐसे में अवमानना कार्यवाही जारी रखने का कोई आधार नहीं बचता।

मामला वर्ष 2019 में बस्तर जिले के जगदलपुर में जारी शिक्षक भर्ती विज्ञापन से संबंधित है। इस भर्ती में जगदलपुर निवासी जगजीत कौर भाटिया ने आवेदन किया था। उनके पास हिंदी विषय में स्नातक की डिग्री के साथ अंग्रेजी साहित्य में स्नातक की पढ़ाई तथा बीएड की अनिवार्य योग्यता भी थी।

चयन प्रक्रिया के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने यह कहकर उनका आवेदन निरस्त कर दिया था कि उन्होंने बीएड करने के बाद स्नातक की डिग्री प्राप्त की है, जिससे वे भर्ती की पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करतीं। इस आधार पर उनका नाम अंतिम चयन सूची से हटा दिया गया। विभाग के इस निर्णय को चुनौती देते हुए जगजीत कौर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

याचिका में उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने बीएड करने से पहले ही स्नातक की डिग्री हासिल कर ली थी और बाद में केवल अंग्रेजी साहित्य विषय में अंकों में सुधार के उद्देश्य से एक अतिरिक्त स्नातक डिग्री प्राप्त की थी। उनका आरोप था कि शिक्षा विभाग ने तथ्यों की सही जांच किए बिना उनका आवेदन गलत आधार पर खारिज कर दिया।

सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने महिला अभ्यर्थी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को नियुक्ति देने के निर्देश दिए थे। आदेश के अनुपालन में देरी को लेकर बाद में अवमानना याचिका दायर की गई। इस पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि नियुक्ति से जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं।

राज्य सरकार के पक्ष को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने माना कि उसके आदेश का पालन हो चुका है और इसके साथ ही अवमानना याचिका को समाप्त कर प्रकरण का निपटारा कर दिया।

यह फैसला न केवल संबंधित अभ्यर्थी के लिए राहत भरा है, बल्कि ऐसे मामलों में एक महत्वपूर्ण उदाहरण भी है, जहां तकनीकी कारणों से योग्य अभ्यर्थियों के आवेदन निरस्त कर दिए जाते हैं। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया कि पात्रता से जुड़े मामलों में तथ्यों की गहन जांच आवश्यक है और मनमानी कार्रवाई स्वीकार्य नहीं है।

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