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छत्तीसगढ़

बस्तर में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने किया ‘शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा’ का शुभारंभ

बस्तर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को बस्तर के नेतानार में “शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा जन सुविधा केंद्र” का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, आईबी निदेशक तपन डेका सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि बस्तर की यह धरती देश के हर नागरिक के लिए तीर्थ समान है। उन्होंने शहीद वीर गुण्डाधुर को याद करते हुए कहा कि वर्ष 1910 में भूमकाल विद्रोह के माध्यम से उन्होंने विदेशी शासन के खिलाफ आदिवासी संघर्ष का नेतृत्व किया था। शाह ने कहा कि उन्हीं की प्रेरणा से वर्ष 2013 से संचालित सुरक्षा कैंप को अब सेवा कैंप में बदलकर आदिवासियों की सेवा के लिए समर्पित किया गया है।

उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर कभी छह पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या हुई थी और जहां स्कूल, अस्पताल तथा राशन व्यवस्था को नक्सलियों ने प्रभावित किया था, आज वहीं जनसेवा का केंद्र स्थापित किया जा रहा है। यह बदलाव बस्तर में शांति और विकास के नए दौर का प्रतीक है।

“नक्सलवाद खत्म करने का उद्देश्य सिर्फ सुरक्षा नहीं, विकास भी”

अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ अभियान का उद्देश्य केवल हथियारबंद गतिविधियों को समाप्त करना नहीं था, बल्कि दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों तक विकास और बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना भी था। उन्होंने बताया कि “नियद नेल्लानार” योजना के तहत गांवों में राशन दुकानें, प्राथमिक विद्यालय, पीएससी और सीएससी केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अब ग्रामीणों को पीने का पानी, आधार कार्ड, राशन कार्ड और केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ गांवों तक मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आयुष्मान योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज भी अब इन इलाकों में उपलब्ध है।

“विकास नहीं होने की वजह नक्सलवाद था”

गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलियों ने वर्षों तक यह भ्रम फैलाया कि विकास नहीं होने के कारण उन्होंने हथियार उठाए, जबकि वास्तविकता यह थी कि हथियारबंद गतिविधियों ने ही विकास को रोके रखा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि रायपुर और अन्य शहरों की तरह विकास कार्य अब तेजी से गांवों तक पहुंचाए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं पर आदिवासी समाज का उतना ही अधिकार है जितना बड़े शहरों में रहने वाले लोगों का है और सरकार का दायित्व है कि वह उनके जीवन में खुशहाली लाए।

70 कैंप बनेंगे जनसेवा केंद्र

अमित शाह ने बताया कि बस्तर में मौजूद लगभग 200 कैंपों में से 70 कैंपों को अगले डेढ़ साल में जनसेवा केंद्रों में बदला जाएगा। इन केंद्रों में बैंकिंग सुविधा, आधार और राशन कार्ड निर्माण, सरकारी योजनाओं का लाभ और कॉमन सर्विस सेंटर के जरिए केंद्र एवं राज्य सरकार की 371 योजनाओं की सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी।

“31 मार्च 2026 के बाद बस्तर में आजादी का नया सूर्योदय”

गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कहा है कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद अब चैन से नहीं बैठना है, बल्कि अगले पांच वर्षों में बस्तर को विकास के नए मॉडल के रूप में स्थापित करना है।

उन्होंने कहा कि आदिवासी संस्कृति, खेल, साहित्य, संगीत और परंपराओं को बढ़ावा देने के लिए “बस्तर ओलंपिक” और “बस्तर पंडुम” जैसे आयोजन शुरू किए गए हैं।

अमित शाह ने कहा कि देश को 1947 में आजादी मिली थी, लेकिन बस्तर में वास्तविक आजादी का सूर्योदय 31 मार्च 2026 के बाद हुआ है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर बस्तर के विकास में कोई कमी नहीं छोड़ेंगी।

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