Home
🔍
Search
Videos
Stories
छत्तीसगढ़छत्तीसगढ़ जनसंपर्क

सेवा की कहानी: पति के निधन के बाद खेती बनी परिवार का सहारा, बिहान से जुड़कर आत्मनिर्भर बनीं उर्मिला

रायपुर। जीवन में आई कठिन परिस्थितियों के सामने हार मानने के बजाय सरगुजा जिले की उर्मिला गुप्ता ने मेहनत और आत्मविश्वास के साथ अपने परिवार की जिम्मेदारी संभाली। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ और आकांक्षा स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने टमाटर, खीरा और अन्य सब्जियों की खेती को आजीविका का आधार बनाया। वर्ष 2024 में पति के निधन के बाद खेती ही उनके परिवार का मजबूत सहारा बनी। आज उर्मिला अपनी मेहनत की कमाई से दोनों बच्चों की पढ़ाई और परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं तथा लखपति दीदी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

समूह से जुड़ीं तो घर की दहलीज से खेत तक बढ़े कदम

उर्मिला बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने से पहले वे अधिकतर घर तक ही सीमित रहती थीं। उनके पास खेती को व्यवस्थित रूप से आजीविका का माध्यम बनाने का विचार नहीं था। बिहान और आकांक्षा स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें टमाटर, खीरा सहित विभिन्न सब्जियों की खेती के बारे में जानकारी और प्रोत्साहन मिला।

इस मार्गदर्शन ने उर्मिला को खेती के माध्यम से स्वयं की आय का साधन तैयार करने की राह दिखाई। उन्होंने सब्जियों की खेती शुरू की और पिछले चार वर्षों से लगातार टमाटर की खेती कर रही हैं। इसके साथ खीरा और अन्य सब्जियों का उत्पादन भी कर रही हैं।

समूह से ऋण लेकर बढ़ाया काम, कमाई से चुकाई पूरी राशि

खेती को आगे बढ़ाने के लिए उर्मिला ने अपने स्व-सहायता समूह से ऋण लिया। इस राशि का उपयोग उन्होंने अपनी आजीविका गतिविधि को बढ़ाने में किया। मेहनत का परिणाम मिला और खेती से आमदनी होने लगी। उर्मिला ने अपनी आय का बेहतर प्रबंधन करते हुए समूह से लिया ऋण भी चुका दिया।

स्व-सहायता समूह से मिले आर्थिक सहयोग और मार्गदर्शन ने उन्हें अपनी आजीविका को आगे बढ़ाने के साथ आर्थिक निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी दिया।

पति के निधन के बाद खेती ने संभाला परिवार

वर्ष 2024 में पति के निधन के बाद उर्मिला के सामने दोनों बच्चों की पढ़ाई, पालन-पोषण और घर चलाने की पूरी जिम्मेदारी आ गई। कठिन समय में पहले से शुरू की गई सब्जियों की खेती परिवार के लिए आय का प्रमुख सहारा बनी।

उर्मिला बताती हैं कि आज वे खेती से होने वाली आमदनी से अपने दोनों बच्चों को पढ़ा-लिखा रही हैं और परिवार की जरूरतें पूरी कर रही हैं। परिस्थितियां कठिन होने के बावजूद उन्होंने खेती का काम नहीं छोड़ा और लगातार मेहनत करते हुए इसे परिवार की आजीविका का मजबूत आधार बनाया।

आत्मनिर्भरता से लखपति दीदी बनने की ओर बढ़े कदम

बिहान से जुड़कर उर्मिला ने केवल आमदनी का साधन ही तैयार नहीं किया, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में अपने परिवार को संभालने का आत्मविश्वास भी हासिल किया। टमाटर, खीरा और अन्य सब्जियों की खेती से आय अर्जित करते हुए अब उनके कदम लखपति दीदी बनने की ओर बढ़ रहे हैं।

उर्मिला ने बिहान के माध्यम से मिले सहयोग और आजीविका के अवसर के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि आज महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार को आर्थिक संबल देने के साथ समाज में अपनी अलग पहचान भी बना रही हैं।

सेवा संकल्प अभियान के तहत उर्मिला की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि स्व-सहायता समूह से मिला अवसर, आर्थिक सहयोग और स्वयं की मेहनत किस तरह कठिन परिस्थितियों में भी एक महिला को अपने परिवार का मजबूत आधार बना सकती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button