हाईकोर्ट ने पूछा – गोधाम के बावजूद सड़कों पर मवेशी क्यो?, सरकार ने कहा – व्यवस्था सुधारने नियुक्त करेंगे नोडल अधिकारी

बिलासपुर। जिले के लाखासार गौधाम की अव्यवस्थाओं को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने हाईकोर्ट में अपना जवाब प्रस्तुत किया। शासन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि गौधाम में मवेशियों के लिए चारे, पानी और रहने की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है।
सरकार ने अपने जवाब में यह भी स्पष्ट किया कि गौधाम के एक छोटे कमरे में 205 मवेशियों को ठूंसकर रखने जैसी कोई स्थिति नहीं है। शासन के अनुसार प्रदेशभर में कुल 142 पंजीकृत गौशालाएं संचालित हैं, जिनमें लगभग 39 हजार मवेशियों को रखा गया है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने शासन से सवाल किया कि यदि व्यवस्थाएं पूरी तरह दुरुस्त हैं तो फिर सड़कों पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा कम क्यों नहीं हो रहा है। इस पर शासन की ओर से जवाब दिया गया कि व्यवस्था सुधारने और निगरानी के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई।
142 रजिस्टर्ड गौशालाओं में 39 हजार मवेशी
राज्य शासन ने शपथ पत्र में बताया कि प्रदेश में 142 रजिस्टर्ड गौशालाएं संचालित हैं, जिनमें करीब 39 हजार मवेशियों को रखा गया है। हालांकि राज्य सरकार के जवाब के बाद भी हाईकोर्ट ने मामले को बंद नहीं किया। डिवीजन बेंच ने कहा कि बार-बार यह बात सामने आ रही है कि गोधाम बनने के बावजूद मवेशी सार्वजनिक स्थानों पर घूम रहे हैं। इससे स्पष्ट होता है कि जिम्मेदार पक्षों की ओर से किए गए इंतजाम अब भी पर्याप्त नहीं हैं। मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी।
नियमित होगी मॉनिटरिंग
सरकार ने बताया कि 7 नवंबर 2025 को जारी आदेश के तहत विशेष नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग के बीच समन्वय स्थापित करना है, ताकि छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम, 2004 के तहत जब्त और आवारा मवेशियों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके। सरकार ने जिला प्रशासन को पशुपालन विभाग के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि गौधामों में रखे गए मवेशियों को सिर्फ छत ही नहीं, बल्कि चारा, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएं। जवाबदेही तय करने के लिए अब पशुपालन विभाग के संचालक को हर महीने प्रोग्रेस रिपोर्ट भेजना अनिवार्य किया गया है।




