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छत्तीसगढ़

सदन तिवारी महाराज के निवास ग्राम में गुरु पूर्णिमा उत्सव, विधायक डॉ. संपत अग्रवाल बोले-गुरु ही दिखाते हैं संस्कार और सत्य का मार्ग

ओडिशा। भारतीय सनातन परंपरा में आषाढ़ पूर्णिमा यानी गुरु पूर्णिमा का स्थान सबसे ऊपर माना गया है। यह वह दिन है जब शिष्य अपने गुरु के चरणों में कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। इसी पावन अवसर पर सदन तिवारी महाराज के ऐतिहासिक निवास ग्राम कोमना में भक्ति और सांस्कृतिक चेतना का एक अद्भुत नजारा देखने को मिला। यहाँ स्थित कृष्णा पब्लिक स्कूल के प्रांगण में गुरु पूर्णिमा उत्सव का गरिमामय आयोजन किया गया।

समारोह में छत्तीसगढ़ के बसना विधायक डॉ. संपत अग्रवाल मुख्य रूप से शामिल हुए । उनके साथ भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय और रायपुर उत्तर विधायक पुरन्दर मिश्रा की विशिष्ट मौजूदगी रही। जैसे ही अतिथियों का काफिला ग्राम कोमना पहुँचा, ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक आत्मीयता के साथ ग्रामवासियों एवं विद्यालय परिवार ने उनका भव्य स्वागत किया। पूरे गाँव में सुबह से ही एक उत्सव जैसा माहौल बना हुआ था।

सदन तिवारी महाराज का निवास स्थल वर्षों से धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। इस परिसर से सटे कृष्णा पब्लिक स्कूल में आयोजित इस कार्यक्रम ने इस बार पूरे अंचल के लोगों को एक सूत्र में पिरोने का काम किया। मुख्य मंच पर दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ हुआ।

मंच से जनसमूह को संबोधित करते हुए विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने गुरु पूर्णिमा के आध्यात्मिक, सामाजिक और शैक्षणिक आयामों पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि गुरु केवल किताबी ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह शिष्य की चेतना को तराशने का काम करता है। अज्ञान के अँधेरे से निकालकर ज्ञान के उजाले की ओर ले जाना ही गुरु का असली धर्म है। हमारी मिट्टी और संस्कृति की ताकत यही है कि हमने हमेशा ज्ञान को धन-दौलत से ऊपर रखा है।

विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने कहा कि आज के दौर में जब शिक्षा आधुनिकता की ओर तेजी से भाग रही है, ऐसे समय में बच्चों को अपनी जड़ों और संस्कारों से जोड़े रखना सबसे बड़ी चुनौती है। स्कूल केवल परीक्षा में अंक दिलाने की फैक्ट्री न बनें, बल्कि वे ऐसे इंसानों का निर्माण करें जो समाज और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझें। जब कोई बच्चा अपने गुरु और माता-पिता के सामने झुकना सीखता है, तो वही संस्कार आगे चलकर उसे जीवन की हर परीक्षा में विजयी बनाते हैं।

इसी कड़ी में भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज की नींव ही गुरु-शिष्य परंपरा पर टिकी है। इतिहास गवाह है कि जब-जब समाज दिशा भटकने लगा, तब-तब महान संतों और गुरुओं ने ही देश को सही राह दिखाई। आज की युवा पीढ़ी को यह समझने की जरूरत है कि तकनीक और आधुनिकता तभी कारगर हैं जब उनके पीछे मजबूत नैतिक मूल्य हों।

उसी प्रवाह को आगे बढ़ाते हुए विधायक डॉ संपत अग्रवाल ने शिक्षा संस्थान के प्रयासों को सराहा। उन्होंने कहा कि कोमना जैसे ग्रामीण अंचल में इस तरह का भव्य और अनुशासित आयोजन यह साबित करता है कि गाँव के बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। सही मार्गदर्शन और गुरु का हाथ सिर पर हो तो ग्रामीण पृष्ठभूमि के बच्चे भी देश-दुनिया में नाम रोशन कर सकते हैं।

औपचारिक भाषणों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बाद परिसर में गुरु-पूजन का विधान संपन्न हुआ। सदन तिवारी महाराज के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और हजारों की संख्या में आए ग्रामीणों ने प्रसाद ग्रहण किया।

विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने कार्यक्रम के समापन अवसर पर क्षेत्रवासियों से सीधे संवाद किया। उन्होंने लोगों की कुशलक्षेम पूछी और अंचल के विकास के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होते, बल्कि ये समाज में आपसी भाईचारे और समरसता को बढ़ावा देते हैं। जब समाज का हर वर्ग एक साथ बैठकर गुरु का आशीर्वाद लेता है, तो सामाजिक दूरियाँ अपने आप मिट जाती हैं।

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