Home
🔍
Search
Videos
Stories
छत्तीसगढ़

नक्सली हमले में घायल जवान की पोस्टिंग पर हाईकोर्ट सख्त, कहा-

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नक्सली हमले में गंभीर रूप से घायल जवान की पुनः नक्सल प्रभावित क्षेत्र में पदस्थापना पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ऐसे जवानों को उनकी शारीरिक स्थिति को देखते हुए अनुसूचित एवं अति नक्सल प्रभावित जिलों में पदस्थ नहीं किया जा सकता।

बता दें कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम नागरदा निवासी याचिकाकर्ता दिनेश ओगरे छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की दूसरी बटालियन, सकरी (जिला बिलासपुर) में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत हैं। याचिका में उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में बीजापुर जिले के पामेड़ में पदस्थापना के दौरान नक्सली हमले में उनके सिर में गोली लगी थी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके अलावा वर्ष 2018 में ड्यूटी के दौरान उनके बाएं पैर में फ्रैक्चर भी हुआ था। इन घटनाओं के कारण उन्हें आज भी चलने-फिरने और कार्य करने में दिक्कत होती है।

इसके बावजूद पुलिस मुख्यालय, रायपुर द्वारा उनकी पदस्थापना पुनः बीजापुर जिले के अति नक्सल प्रभावित अदवाड़ा कैंप में कर दी गई, जिससे आहत होकर उन्होंने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं ऋषभदेव साहू के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर स्थानांतरण आदेश को चुनौती दी।

अधिवक्ताओं ने कोर्ट के समक्ष तर्क दिया कि पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) द्वारा 3 सितंबर 2016 और 18 मार्च 2021 को जारी सर्कुलर में स्पष्ट निर्देश है कि नक्सली हमले में घायल जवानों से उनकी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही ड्यूटी ली जाए और उन्हें घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पदस्थापित न किया जाए। साथ ही उनके स्वास्थ्य का नियमित ध्यान रखा जाए।

सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए एडीजीपी (प्रशासन) और एडीजीपी, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ता के मैदानी जिले में पदस्थापना संबंधी आवेदन का तत्काल निराकरण करें। कोर्ट के इस फैसले को नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कार्यरत सुरक्षाबलों के जवानों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button