रायपुर के प्राचीन तालाब तेलीबांधा – मरीन ड्राइव में बनी मानव श्रृंखला
नवा रायपुर और सभी शहरी क्षेत्र में अर्बन फॉरेस्ट, डेवलपमेंट की उठायी पुरजोर मांग

विश्व पर्यावरण दिवस
हुआ गौरवशाली और सफल आयोजन……
प्रकृति प्रेमियों नेसौंदर्यीकरण की आड़ नेचर से खिलवाड़ और अनावश्यक निर्माण तत्काल बंद करने सहित
रायपुर, 5 जून 2026। छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा की अपील पर विश्व पर्यावरण दिवस पर जन जागरूकता बढ़ाने छत्तीसगढ़ तर्कशील परिषद्, अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति, ग्रीन आर्मी अमलीडीह चेप्टर तथा ब्रेक थ्रो सोसायटी, अन्य सामाजिक शैक्षणिक संस्थाओं ने आगे आकर रायपुर के प्राचीन संरक्षित तालाब तेलीबांधा – मरीन ड्राइव पर मानव श्रृंखला का निर्माण किया। इस अवसर पर जंगल बचाने , पानी बचाने, हवा बचाने और जमीन तथा जिंदगी बचाने का संदेश दिया गया।
उल्लेखनीय है कि यह कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र संघ के 1972 में स्टॉकहोम सम्मेलन द्वारा लिए संकल्प के बाद हर वर्ष एक नई थीम के साथ मनाया जाता है।

इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस 2026 की थीम – “प्रकृति से प्रेरित- बेहतर, जलवायु और बेहतर भविष्य के लिए” – इस थीम आधार पर आयोजित किया गया।
इस सफल मानव श्रृंखला के लिए समाज के विभिन्न वर्गों के गणमान्य नागरिक, प्रशासनिक अधिकारियों, डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षाविद तथा पर्यावरण प्रेमियों और जागरूक नागरिकों ने उत्साह पूर्वक हिस्सेदारी की।
कार्यक्रम की शुरुआत छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के पर्यावरण गीत “पेड़ हैं सांसे ,पेड़ हैं जीवन” के सामूहिक गायन से हुई।
इसके पश्चात उपस्थित नागरिकों ने पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। विभागीय जांच आयुक्त दिलीप वासनिकर, नेहा वासनिकर, रायपुर संभाग के पूर्व कमिश्नर कर्मवीर महादेव कावरे,छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के अध्यक्ष विश्वास मेश्राम, वरिष्ठ सदस्य एवं पर्यावरणविद उमा प्रकाश ओझा, जैविक खेती के विशेषज्ञ लक्ष्मीकांत अग्रवाल, कृषि वैज्ञानिक अश्वनी बंजारा, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ स्नेहलता हुमने, रंगकर्मी रतन गोंडाने, अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के डाॅ. दिनेश मिश्र, ग्रीन आर्मी के अमिताभ दुबे, तर्कशील परिषद् के डॉ रमेश सुखदेवे, विज्ञान सभा के बेनीराम गायकवाड़, सामाजिक कार्यकर्ता महेंद्र बागड़े, लेखक डॉ संजीव खुदशाह, तर्कशील मिथुन बंजारे सहित सैकड़ो जागृत नागरिक उपस्थित रहे।
पूर्व कमिश्नर रायपुर संभाग कर्मवीर महादेव कावरे द्वारा अपने सारगर्भित उदबोधन में अपने दक्षिण अफ्रीका अध्ययन यात्रा के दौरान केप टाउन का उदाहरण देते हुए बताया गया कि किस तरह वहां पर भूगर्भीय जल का विकराल संकट खड़ा हो गया है। आज पानी की कमी की वजह से कल का गुलजार केपटाउन शहर उजड़ गया है। वहां के निवासी, व्यापारी और उद्योग धंधे दूसरी जगहों पर बसने के लिए मजबूर हो गए हैं। उन्होंने रायपुर में आयोजित इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण बचाने छोटे छोटे कदम भी आगे चलकर बहुत बड़ा परिणाम देते हैं। उन्होंने रायपुर शहर के भू- जल स्तर को सुधारने के लिए और बढ़ते तापमान को कम करने के लिए योजनाबद्ध कार्य करने का सुझाव दिया।
विभागीय जांच आयुक्त दिलीप वासनीकर द्वारा भिलाई दुर्ग के अपने कार्यकाल में तालाबों के संरक्षण के कार्यों की याद दिलाई और कहा कि सामूहिक प्रयासों से हम जल जंगल जमीन और हवा बचाने का बड़ा काम कर सकते हैं।
छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के अध्यक्ष विश्वास मेश्राम ने फ्यूचर ऑफ़ इंडिया अभियान के तहत आजादी के सौ साल होने पर 2047 तक भारत को विज्ञान और प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बनाने में आम जनता की पहल को बहुत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने क्लाइमेट चेंज के कारण कृषि पर पड़ने वाले खतरनाक प्रभावों को कम करने के लिए सरकार और आम जनता दोनों की भूमिका रेखांकित की।
अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ दिनेश मिश्र ने पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़ी संख्या में आम लोगों की भागीदारी की जरूरत बताई।
विज्ञान सभा की रायपुर इकाई की सचिव और इस पूरे मानव श्रृंखला की संयोजिका डॉ अंजू मेश्राम ने बढ़ती गर्मी और हीट वेव को कम करने के उपायों पर प्रकाश डालते हुए रायपुर शहर को गर्मी में भी ठंडा रखने के लिए चरणबद्ध कार्ययोजना की रूपरेखा बताई।
ग्रीन आर्मी छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष अमिताभ दुबे ने प्रदेश में ग्रीन आर्मी द्वारा किए जा रहे कामों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हर पर्यावरण दिवस के दिन ग्रीन आर्मी के प्रत्येक सदस्य को पर्यावरण संरक्षण के लिए एक निश्चित कार्य सौंपा जाता है।
विज्ञान सभा के वरिष्ठ सदस्य अधीर भगवनानी ने सभी नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों के किनारे बनाई जा रही कंक्रीट की नालियों में, पानी के रिचार्ज के लिए छोटे छोटे छिद्र छोड़ने की मांग की ताकि इन छिद्रों से पानी रिसकर भूजल के स्तर को ऊपर उठा सकें।
डी एम ए इंडिया चैनल के संपादक डॉ संजीव ख़ुदशाह ने तालाबों की घटती संख्या पर चिंता जाहिर की।
विज्ञान सभा के वरिष्ठ सदस्य और पर्यावरण कार्यकर्ता उमा प्रकाश ओझा ने रायपुर से नवा रायपुर शिफ्ट हो रहे दफ्तरों और सरकारी कालोनियों के आसपास की सभी जगहों पर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाने के बजाय वहां की जमीनों पर संरक्षित अर्बन फॉरेस्ट लगाने का सुझाव दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन अर्बन फॉरेस्ट में केवल जंगल हो और अन्य सभी तरह की शहरी गतिविधियां पूरी तरह प्रतिबंधित हो।
वक्ताओं ने प्रकृति संरक्षण, वनों की कटाई पर रोक, छत्तीसगढ़ के परंपरागत वृक्षों – नीम, महुआ, कौहा अर्जुन, बेल, आम, इमली, बरगद ,पीपल गश्ती , गुलर, साल, साजा बीजा, सागौन, खम्हार, धावड़ा आदि देशी वृक्षारोपण को बढ़ावा देने, तालाबों एवं नदियों के संरक्षण तथा प्रदूषण कम करने के प्रभावी उपायों पर विचार व्यक्त किए।
उपस्थित जनों ने इस बात पर चिंता जताई कि सौंदर्यीकरण के नाम पर अनेक स्थानों पर अनावश्यक निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने ऐसे क्षेत्रों में अधिक से अधिक वृक्षारोपण कर अर्बन फॉरेस्ट – शहरी वन -विकसित करने की पुरजोर मांग की, जिससे शहरों में हरित क्षेत्र बढ़े और पर्यावरण संतुलन बना रहे।
इस अवसर पर रंगकर्मी रतन गोंडाने ने भूमि गीत गाकर संदेश दिया कि ये भूमि हमें आने वाली पीढ़ियों को और अधिक सुंदर बनाकर सौंपने के लिए हमारे पुरखों से कर्ज में मिली है। यह हमें विलासिता के लिए, इसकी धन संपदा को लूटने के लिए नहीं मिली है बल्कि इसके सुंदर नदी नालों, झीलों, जंगलों, पहाड़ों को बचाकर आने वाली पीढ़ियों को सौंपने के लिए मिली है। हम सबकी यह सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों का विरोध करें और अभी तक की ज्ञात हमारी आकाशगंगा के इस एकमात्र नीले हरे ग्रह में जीवन को बचाने में योगदान दें।
पर्यावरण दिवस पर आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम के आखिर में सभी लोगों ने मानव श्रृंखला बनाकर तेलीबांधा तालाब का एक पूरा चक्कर लगाया।
छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के अध्यक्ष विश्वास मेश्राम द्वारा आकाशवाणी रायपुर, जिला प्रशासन रायपुर और सम्मिलित संगठनों, ब्रेकथ्रू साइंस सोसाइटी, छत्तीसगढ़ तर्कशील परिषद्, अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति, ग्रीन आर्मी अमलीडीह रायपुर सहित विज्ञान सभा के साथियों को धन्यवाद देते हुए कार्यक्रम को विराम दिया गया।




