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बहुराष्ट्रीय कंपनियां (MNCs) यूरोप और दुनिया के बाकी देशों के मुकाबले भारत में घटिया क्वालिटी का बेच रही सामान: सांसद बृजमोहन अग्रवाल

नई दिल्ली।  लोकसभा में नियम 377 के तहत एक बहुत ही अहम मुद्दा उठाते हुए, रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भारत में काम कर रही कई विदेशी कंपनियों की “दोहरी मानसिकता” की कड़ी आलोचना की। उन्होंने बताया कि ये कंपनियाँ ऐसे प्रोडक्ट बेचती हैं जिनकी क्वालिटी पश्चिमी बाजारों में बेचे जाने वाले प्रोडक्ट की तुलना में काफी कम होती है।

बृजमोहन ने इन दोहरे मापदंडों के पक्के उदाहरण भी दिए। उन्होंने बताया कि जो बेबी फूड यूरोप के बाजारों में बिकता है. उसमें अलग से कोई चीनी नहीं होती। लेकिन हैरानी की बात है कि वहीं ब्रांड जब भारतीय माताओं को अपना सामान बेचते हैं, तो वह चीनी से भरा होता है। उन्होंने आगे बताया कि भारतीय उत्पादों में कोको बटर जैसी प्रीमियम चीजों को अक्सर सस्ते वनस्पति तेल से बदल दिया जाता है।

सांसद ने जोर देकर कहा कि ऐसी हरकतें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वस्थ भारत’ के सपने को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाती हैं। उन्होंने कहा कि भारत को खराब सामान खपाने के लिए “डंपिंग ग्राउंड” नहीं बनाया जा सकता और देश के नागरिकों की सेहत देश के भविष्य के लिए सबसे ज्यादा जरनी है।

रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि, “हमारे नागरिकों की सेहत ही देश का भविष्य है। हम यह बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे कि ग्लोबल ब्रांड्स भारत में तो ज्यादा चीनी वाला बेबी फूड या सस्ते तेल का इस्तेमाल करें, लेकिन विदेशों में अच्छी क्वालिटी बनाए रखें। अब समय आ गया है कि FSSAI पूरी दुनिया में ‘एक ब्रांड, एक क्वालिटी का नियम सख्ती से लागू करे। भारत दुनिया का एक लीडर है, न कि घटिया उत्पादों का डंपिंग ग्राउंड।”

अग्रवाल ने केंद्र सरकार से तुरंत ये कदम उठाने की अपील कीः

1. FSSAI नियमों में बदलावः खाने की सुरक्षा और क्वालिटी के मौजूदा नियमों को और सख्त किया जाए।

2. वैश्विक समानता (Global Parity) लागू हो: यह सुनिश्चित किया जाए कि भारत में काम करने वाला कोई भी ग्लोबल ब्रांड ठीक उसी क्यालिटी का पालन करे जो वह अपने मूल देश (country of origin) में करता है।

3. कड़ी निगरानीः ऐसे कम पोषण वाले उत्पादों की बिक्री रोकी जाए जो लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करते.

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