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छत्तीसगढ़

प्लास्टिक बना बड़ा संकट, विधानसभा में उठा मुद्दा; सरकार बोली—रोकथाम के लिए होंगे ठोस कदम

रायपुर। प्लास्टिक न केवल प्रदेश के लिए, बल्कि देश-दुनिया के लिए भी एक बड़ी समस्या है. आलम यह है कि न केवल यह पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि जानवरों के साथ-साथ इंसानों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है. शोध बताते हैं कि माइक्रो प्लास्टिक हमारे दिमाग तक प्रवेश कर चुका है.

प्लास्टिक से होने वाले गंभीर नुकसान को देखते हुए भाजपा विधायक अजय चंद्राकर विधानसभा में अशासकीय संकल्प लेकर आए थे. विषय पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष इसकी गंभीरता को लेकर एकमत से इसके निपटान के साथ कड़ी कार्रवाई को लेकर समर्थन जताया.

पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि प्लास्टिक पर कड़े प्रतिबंध लगाने अशासकीय संकल्प लाया गया. उसे मेरे वक्तव्य और आग्रह के बाद अजय चंद्राकर ने वापस ले लिया है. यह सच है कि छत्तीसगढ़ में प्लास्टिक वर्तमान में एक बड़ी समस्या है. और यह पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक है.

मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि इस पर कैसे रोक लगाई जा सकती है. प्लास्टिक कचरे का बेहतर निपटान कैसे हो सकता है. विभिन्न विभागों के साथ समन्वय कैसे हो सकता है. समाज में जागरूकता कैसे आ सकती है. इस पर गम्भीरता काम किया जा रहा है. और आगे इस कड़ी कार्रवाई के साथ काम होगा.

इसके पहले कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने कहा कि शराब प्लास्टिक में दिया जा रहा है यह अत्यंत गलत है. कचरे के ढेर ढहने से 7 लोगों की मौत हो गई. प्लास्टिक से बड़ा नुकसान हो रहा है. इससे जल, जमीन सब दूषित हो रही है. छत्तीसगढ़ में 140 टन उपयोग होता है. प्रतिदिन 40 टन प्लास्टिक कचरा का निपटान नहीं हो रहा है.

उन्होंने कहा कि प्लास्टिक के बारे में लीडर क्यों नहीं हो सकते हैं. जरूरी है कि सामाजिक आंदोलन बने और सरकार इसमें भूमिका निभाए. प्लास्टिक प्रदूषण बढ़ रहा है. जाने-अनजाने में व्यक्ति 5 ग्राम प्लास्टिक ले रहा है. सड़क में प्लास्टिक का इस्तेमाल हो तो इसका रिसाइकिल हो. अजय चंद्राकर को बधाई. विपक्ष मुद्दे पर साथ है.

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