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छत्तीसगढ़

CGMSC घोटाला: ACB-EOW ने 4 नामजद आरोपियों के खिलाफ 3500 से अधिक पन्नों का पूरक चालान किया पेश, सरकार को 550 करोड़ की पहुंचाई थी आर्थिक क्षति

रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) से जुड़े बहुचर्चित घोटाले में ACB-EOW ने आज कोर्ट में पूरक चालान पेश कर दिया है। यह चालान 4 आरोपियों के खिलाफ पेश किया गया है, जो 3500 पन्नों से अधिक का है। इन आरोपियों में अभिषेक कौशल, राकेश जैन, प्रिंस कोचर और कुंजल शर्मा के नाम शामिल हैं। ये सभी आरोपी अभी रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं।

जानकारी के अनुसार, यह मामला अपराध क्रमांक-05/2025 के तहत दर्ज है, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 120बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(1)(ए), 13(2) एवं 7(सी) के तहत कार्रवाई की जा रही है।

इन आरोपियों के खिलाफ पेश हुआ चालान

आज पूरक चालान में जिन चार आरोपियों को नामजद किया गया है, वे इस प्रकार हैं—

अभिषेक कौशल, डायरेक्टर, रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा. लि., पंचकुला
राकेश जैन, प्रोप्राइटर, श्री शारदा इंडस्ट्रीज, रायपुर
प्रिंस कोचर, लायजनर (रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स)
कुंजल शर्मा, मार्केटिंग हेड, डायसिस इंडिया प्रा. लि., नवी मुंबई।

‘हमर लैब’ योजना में की गई गड़बड़ी

जांच एजेंसी ने बताया कि राज्य की आम जनता को निःशुल्क डायग्नोस्टिक जांच उपलब्ध कराने के लिए जिला अस्पतालों, एफआरयू, सीएचसी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं उप स्वास्थ्य केंद्रों में ‘हमर लैब’ योजना के अंतर्गत क्रय किए जाने वाले मेडिकल उपकरण एवं रिएजेंट्स की निविदा प्रक्रिया में पुल टेंडरिंग के माध्यम से मोक्षित कॉर्पोरेशन द्वारा निविदा प्राप्त की गई। विवेचना में यह तथ्य सामने आया है कि प्रिंस कोचर, शशांक चोपड़ा का सगा जीजा है और रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा. लि. के लिए लायजनिंग का कार्य करता है। रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा. लि. एवं श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने भविष्य में सीजीएमएससीएल में अपना सप्लाई चेन मजबूत करने के उद्देश्य से मोक्षित कॉर्पोरेशन को सहयोग किया।

तीनों फर्मों द्वारा अपनी अर्हता सुनिश्चित करने के लिए टेंडर की शर्तों के अनुसार वास्तविक क्षमता से भिन्न उत्पादक क्षमता, सर्विस, मेंटेनेंस एवं इंस्टॉलेशन के फर्जी दस्तावेज तैयार कर निविदा में उपयोग किए गए, जिसके लिए प्रिंस कोचर द्वारा समन्वय कार्य किया गया।

जांच में यह भी सामने आया है कि निविदा प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने के उद्देश्य से कुछ फर्मों द्वारा आपसी समन्वय और कार्टेलाइजेशन किया गया। टेंडर में यही तीन फर्में शॉर्टलिस्ट हुई थीं, जिनके वित्तीय दर खोले गए। तीनों पात्र फर्मों द्वारा भरे गए टेंडर में उत्पाद, पैक साइज, रिएजेंट और कंज्यूमेबल्स का विवरण समान पैटर्न में भरा गया। जिन उत्पादों का नाम निविदा दस्तावेज में स्पष्ट रूप से अंकित नहीं था, उन्हें भी तीनों फर्मों द्वारा समान रूप से दर्शाया गया। दरें भी समान पैटर्न में कोट की गईं, जिसमें सबसे कम दर मोक्षित द्वारा, उसके पश्चात आर.एम.एस. तथा श्री शारदा इंडस्ट्रीज द्वारा कोट की गई।

एमआरपी से तीन गुना तक की गई वसूली

साथ ही मेडिकल उपकरणों के रिएजेंट्स एवं कंज्यूमेबल्स के लिए डायसिस कंपनी ने निश्चित एमआरपी तय की थी। आरोपी कुंजल शर्मा द्वारा मोक्षित कॉर्पोरेशन के पार्टनर शशांक चोपड़ा के साथ मिलकर षड्यंत्रपूर्वक रिएजेंट्स एवं कंज्यूमेबल्स के तय एमआरपी से कहीं अधिक दर सीजीएमएससी को डायसिस कंपनी की ओर से प्रेषित की गई। इसके कारण निविदा में सीजीएमएससी ने मोक्षित कॉर्पोरेशन की मनमानी दरों को मान्य कर लिया। फलस्वरूप मोक्षित कॉर्पोरेशन द्वारा सीजीएमएससी को वास्तविक एमआरपी से तीन गुना तक अधिक कीमत पर रिएजेंट्स एवं कंज्यूमेबल्स की आपूर्ति कर शासकीय राशि का दुरुपयोग किया गया, जिससे शासन को लगभग 550 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति हुई।

अब तक 10 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश, जांच जारी

इस मामले में अब तक 10 आरोपियों के विरुद्ध चालान प्रस्तुत किया जा चुका है। जनहित से जुड़ी ‘हमर लैब’ योजना में शासकीय राशि के दुरुपयोग से संबंधित सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय कर आगे भी संबंधितों के विरुद्ध कठोर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

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