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23 फरवरी से शुरू होगा छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र: 15 बैठकें प्रस्तावित, विस अध्यक्ष रमन सिंह बोले- दो महत्वपूर्ण विधेयक होंगे पेश

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र 23 फरवरी से 20 मार्च तक आयोजित किया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने आज पत्रकार वार्ता में सत्र की रूपरेखा और कार्यसूची की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस बजट सत्र में कुल 15 बैठकें प्रस्तावित हैं। सत्र की शुरुआत सोमवार, 23 फरवरी 2026 को सुबह 11:05 बजे राज्यपाल रामेन डेका के अभिभाषण से होगी। राज्यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव पर चर्चा 25 फरवरी को की जाएगी। अभिभाषण का सीधा प्रसारण दूरदर्शन और आकाशवाणी से किया जाएगा।

24 फरवरी को पेश होगा बजट

वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी 24 फरवरी 2026 को अपराह्न 12:30 बजे वर्ष 2026-27 का आय-व्ययक (बजट) प्रस्तुत करेंगे। बजट भाषण का सीधा प्रसारण दूरदर्शन रायपुर और आकाशवाणी रायपुर से किया जाएगा।

वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर सामान्य चर्चा 26 और 27 फरवरी को होगी। इसके बाद 9 से 17 मार्च तक विभागवार अनुदान मांगों पर चर्चा निर्धारित है। 17 मार्च को आय-व्ययक की मांगों से संबंधित विनियोग विधेयक का पुरःस्थापन किया जाएगा, जबकि 18 मार्च को विनियोग विधेयक पर चर्चा और पारण की तिथि तय की गई है।

दो महत्वपूर्ण विधेयक प्रस्तावित

विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि शासकीय विधि-विषयक कार्यों के अंतर्गत दो महत्वपूर्ण विधेयकों की सूचनाएं प्राप्त हुई हैं—
(1) छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026
(2) छत्तीसगढ़ लोक सुरक्षा (उपाय) प्रवर्तन विधेयक, 2026

इन विधेयकों को लेकर सत्र के दौरान राजनीतिक चर्चा और बहस की संभावना जताई जा रही है।

प्रश्नों और प्रस्तावों की बड़ी संख्या

सत्र के लिए अब तक कुल 2813 प्रश्नों की सूचनाएं प्राप्त हुई हैं, जिनमें 1376 तारांकित प्रश्न शामिल हैं। इसके अलावा ध्यानाकर्षण प्रस्ताव की 61 सूचनाएं, नियम 139 के अंतर्गत अविलंबनीय लोक महत्व के विषय पर चर्चा के लिए 1 सूचना, 13 अशासकीय संकल्प, शून्यकाल की 9 सूचनाएं तथा 112 याचिकाएं भी प्राप्त हुई हैं।

निधन उल्लेख

सत्र के दौरान अविभाजित मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व सदस्य दीनदयाल सिंह पोर्ते के निधन का उल्लेख भी किया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि बजट सत्र में वित्तीय, विधायी और जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी। सरकार और विपक्ष के बीच विभिन्न विषयों पर सार्थक बहस की संभावना है, जिससे राज्य की नीतिगत दिशा तय होगी।

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