भूपेश बघेल ने कहा – बस्तर में अमित शाह ने जो कहा वह सिर्फ झूठ का पुलिंदा, केंद्रीय गृहमंत्री 2022 का अपना बयान याद कर लेते तो सच समझ में आ जाता…

रायपुर। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पिछले दिनों छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद खत्म होने की घोषणा की, हम इस घोषणा का स्वागत करते हैं। सभी को करना चाहिए। छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनने के बाद यानी 2024 जनवरी से अब तक अमित शाह ने बस्तर की 10 से अधिक यात्राएं की है, यानी वे नक्सल विरोधी ऑपरेशन की निगरानी ख़ुद कर रहे थे, इसका भी स्वागत है, लेकिन केंद्रीय क्षेत्रीय परिषद की बैठक में और उसके बाद अमित शाह ने जो कुछ कहा वह सिर्फ झूठ का पुलिंदा है। स्पष्ट दिखता है कि छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने अमित शाह को बस्तर के बारे में झूठी जानकारी दी है, जिससे वे भ्रमित हो गए।
भूपेश बघेल ने कहा, सच यह है कि 2018 से 2023 के बीच कांग्रेस की सरकार ने बस्तर में नक्सली उन्मूलन की दिशा में ठोस कार्य किया और उसी के दम पर वर्तमान सरकार सफलतापूर्वक नक्सली अभियान चला पाई। अमित शाह ने खुद जाकर बस्तर के एक कैंप का औचक निरीक्षण किया था और देखा था कि किस तरह कैंप में बिजली, राशन की दुकान, खेल का मैदान आदि काम कर रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों से बात भी की थी और संतुष्ट होकर लौटे थे।
बघेल ने कहा, सच यह है कि 2022 में ख़ुद अमित शाह ने माना था कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से नक्सली घटनाओं में बहुत प्रतिशत की कमी आई है। अमित शाह ने 2022 की क्षेत्रीय परिषद की बैठक के बाद कहा था, ‘‘वामपंथी उग्रवाद की समस्या अब छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों तक ही सीमित है। जब 2009 में वामपंथी उग्रवादी हिंसा (Left Wing Extremism) चरम पर थी तब वामपंथी उग्रवादी हिंसक घटनाओं की संख्या 2258 थी, जो 2021 में घटकर 509 हो गई। उन्होंने कहा था कि 2019 से वामपंथी उग्रवाद की घटनाओं में बहुत तेजी से कमी आई है।
केंद्र सरकार ने की थी हमारी सरकार के कामकाज की तारीफ : बघेल
भूपेश बघेल ने कहा, 2009 में वामपंथी उग्रवादी हिंसा में 1005 लोगों की मृत्यु हुई थी जबकि 2021 में 147 लोगों की जान गई। शाह ने कहा था कि इस दौरान पुलिस थानों पर वामपंथी उग्रवादी हिंसा में भी कमी आई है, 2009 में ऐसी 96 घटनाएं हुई थी जो कि 2021 में कम होकर 46 हो गई। सच यह है कि आरपीएफ के डीजीपी ने भी कहा था कि अब नक्सली पैक-अप की तैयारी कर रहे हैं। सच यह है कि कांग्रेस की सरकार ने बस्तर में सुरक्षा बलों के कैंप खोलने और सड़क बनाने का काम खामोशी से करना शुरू किया था और इससे बस्तर की तस्वीर बदलने लगी थी। केंद्र सरकार लगातार हमारे कामों पर निगरानी रखे हुए थे और हर बैठक में केंद्र सरकार ने हमारी सरकार के कामकाज की तारीफ ही की।
‘अमित शाह को मिली गलत जानकारी’
भूपेश बघेल ने कहा, अमित शाह को उनके अपने मंत्रालय और राज्य सरकार ने यह नहीं बताया कि कांग्रेस की सरकार के रहते ही बस्तर का कोंडागांव जिला और बस्तर के 600 गांव नक्सल मुक्त घोषित हो चुके थे। अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद की वजह से स्कूल बंद हुए। यह बात सही है, लेकिन अमित शाह यह बताना भूल गए कि 400 स्कूल भाजपा की रमन सिंह सरकार के बीच बंद हुए। अमित शाह का झूठ यह है कि उन्होंने बस्तर में नए सिरे से स्कूल खोलने शुरू किए। सच यह है कि कांग्रेस की सरकार के दौरान बस्तर में बंद हुए स्कूलों में से 275 स्कूल फिर से खुल गए थे।
बघेल ने कहा, अमित शाह को यह नहीं बताया गया कि राज्य की साय सरकार ने राज्य भर में 10,463 स्कूल बंद करने का निर्णय लिया है, जिसमें से 1,163 स्कूल बस्तर संभाग के ही हैं। अमित शाह ने कहा कि लोगों को अनाज नहीं मिलता था, लेकिन राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा ने अमित शाह को यह नहीं बताया कि बस्तर संभाग के सात जिलों में 2023 के अंत तक कुल 1538 पीडीएस यानी राशन की दुकानें काम कर रही थी। बस्तर में 338, कांकेर में 412, कोंडागांव में 312, दंतेवाड़ा में 152, सुकमा में 138, बीजापुर में 114 और नारायणपुर में 62 राशन की दुकानें काम कर रही थी। अमित शाह को साय सरकार ने यह नहीं बताया कि इन राशन की दुकानों से 2023 के अंत में कुल 21,200 मीट्रिक टन चावल का वितरण प्रति माह हो रहा था।
पूर्व सीएम बघेल ने कहा, अमित शाह को छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार यह भी बताना भूल गई कि छत्तीसगढ़ में अंत्योदय अन्न योजना के तहत प्रति परिवार को 35 किलो चावल मिल रहा था। अगर अमित शाह को 35 किलो चावल की बात बताई गई होती तो वे सात किलो चावल भिजवाने की बात नहीं करते। अगर राज्य की साय सरकार सही जानकारी दी होती तो अमित शाह को यह पता होता कि राज्य में पहले से ही आदिवासियों को 32 प्रतिशत आरक्षण सरकारी नौकरियों में मिलता है और जिले के स्तर पर आरक्षण 32 से 50 प्रतिशत तक मिलता है। अगर उन्हें पता होता तो वे 15 प्रतिशत आरक्षण की बात नहीं करते। वह तो केंद्र की ओर से मिलता ही है। क्या अमित शाह को साय सरकार ने जानकारी दी कि कांग्रेस सरकार ने 5 साल में कुल 4.57 लाख व्यक्तिगत वनाधिकार पट्टे और 46 हजार सामुदायिक वनाधिकार पट्टे बांटे।
‘जो अमित शाह कहना भूल गए’
भूपेश बघेल ने कहा, अमित शाह यह कहना भूल गए कि 15 साल की रमन सिंह सरकार में नक्सलवाद से गलत ढंग से लड़ाई लड़ी गई और इससे आदिवासियों को भीषण पीड़ा और प्रताड़ना झेलनी पड़ी। वे यह कहना भूल गए कि रमन सिंह सरकार के समय ही बस्तर से सात सौ गांव खाली करवाने पड़े और इसकी वजह से हजारों लोग पड़ोस के राज्य में पलायन कर गए। वे यह कहना भूल गए कि भाजपा के 15 साल की सरकार में बेहिसाब फर्जी एनकाउंटर हुए और हजारों मासूम आदिवासियों को झूठे नक्सली मामलों में फंसा कर जेल भेज दिया गया। अमित शाह यह याद नहीं कर पाए कि रमन सिंह ने ही सुरक्षा विशेषज्ञ केपीएस गिल से कहा था कि काम करने की जरुरत नहीं, वेतन लो और मौज करो। अमित शाह को याद करना था कि भाजपा की सरकार के समय ही कथित नक्सली हमलों में कांग्रेस के नेताओं की एक पूरी पीढ़ी खत्म हो गई। उन्हें यह भी याद करना था कि आजाद भारत के उस सबसे बड़े राजनीतिक हत्याकांड की जांच भी भाजपा ने न की और न होने दी। उन्हें याद करना था कि 15 साल के भाजपा शासनकाल में किस तरह से सरकारी अधिकारियों ने पत्रकारों को जान से मारने की धमकियां दी और उनके घरों पर हमले करवाए।
‘साय सरकार अमित शाह को अंधेरे में न रखे’
बघेल ने कहा, बस्तर से नक्सली समस्या खत्म हो यह हम सबका सपना था। इसका फिर से और बार-बार स्वागत है, लेकिन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को दुनिया को यह बताने की कोशिश नहीं करनी चाहिए कि वे बस्तर के लोगों को किसी अंधेरी गुफ़ा से अभी निकाल कर लाए हैं। जिस बस्तर के बारे में वे बता रहे हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि वहीं से देश को दशकों से लौह अयस्क मिल रहा है। उसी बस्तर में नगरनार नाम का इस्पात संयंत्र बन चुका है, जिसे उनकी सरकार बेचने के फिराक में है। उसी बस्तर से टिन अयस्क निकलता है, जो भारत में कहीं और नहीं निकलता। उसी बस्तर से शानदार ग्रेनाइट निकलता है।
भूपेश बघेल ने कहा, बस्तर नक्सलवाद से पीड़ित जरुर था अमित शाह जी, लेकिन परिस्थितियां 2018 के बाद लगातार सुधर रही थी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से अपेक्षा है कि वे श्रेय जरुर लें, लेकिन कांग्रेस सरकार के कंधे पर पैर रखकर ऊंचा दिखने की कोशिश न करें। राज्य की साय सरकार से भी अपेक्षा है कि वह अमित शाह को अंधेरे में न रखे।
गाय-भैंस देने की योजना पर महंत ने सरकार को घेरा
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि अमित शाह बस्तर में अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्रियों के बीच अपनी वाहवाही कर गए हैं और हर आदिवासी परिवार को एक गाय और एक भैंस देने की एक योजना की घोषणा कर गए हैं। उन्होंने गुजरात के आनंद के दुनिया के सबसे सफल सहकारी दुग्ध संगठन की तर्ज पर बस्तर में मिल्क नेटवर्क खड़ा करने की बात भी कही है। यह भी कहा है कि छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा गुजरात जाकर डेयरी देख आए हैं।
महंत ने कहा, 70 बरसों के लिए कांग्रेस सरकारों को गाली देने वाले अमित शाह के मुंह से आनंद के सहकारी प्रयोग की तारीफ इसलिए अच्छा लगता है कि यह पूरी तरह से कांग्रेस सरकार के समय की कामयाबी है। नेहरू और इंदिरा गांधी ने जिस तरह डॉ. वर्गीज कुरियन को आनंद भेजकर इस अविश्वसनीय विकास का रास्ता खोला था, उसी की वजह है कि आनंद ने एक विश्व इतिहास बनाया। यह अच्छी बात है अगर डॉ. कुरियन के खड़े किए हुए सहकारिता के प्रयोग से अमित शाह कुछ सीख रहे हैं, और उनका या नेहरू जी, इंदिरा जी का नाम लिए बिना भी दूध के नेटवर्क की बात कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, अमूल की पिछली पौन सदी की मेहनत से मिली कामयाबी आज बाकी देश के सामने एक बड़ी मिसाल तो है ही, लेकिन इस मौके पर हम अमित शाह को यह याद दिलाना चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ में लगातार 15 साल तक रही डॉ. रमन सिंह की सरकार ने भी शुरू से ही हर आदिवासी परिवार को एक दुधारू गाय देने की योजना शुरू की थी। इसकी घोषणा शायद 2003 के भाजपा के चुनाव घोषणा पत्र में ही हुई थी। बाद में जहां-जहां रमन सरकार ने गाय बांटीं, वे तमाम गाय बीमार निकलीं, या दूध देती ही नहीं थी। उस समय पूरे देश के पशु सप्लायरों के बीच छत्तीसगढ़ सबसे चहेता राज्य था, जहां बीमार या बिना दूध वाली गाय सप्लाई कर दी गई थी और कुछ ही महीनों में अधिकतर गाय या तो मर गईं या बिक गई थीं। वह वक्त भी छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार का था, और सैकड़ों करोड़ के इस घोटाले के बाद इस योजना को ही बंद कर दिया गया था। अब अगर फिर से आदिवासी इलाकों में गाय-भैंस बांटने की योजना बन रही है तो अमित शाह को चाहिए कि डॉ. रमन सिंह को इस योजना की सलाहकार समिति का अध्यक्ष बनाएं, ताकि उनके अपने मुख्यमंत्रित्व के कटु अनुभव का लाभ इस योजना को मिल सके।
पत्रकार वार्ता में पूर्व मंत्री सत्यनारायण शर्मा, अमितेश शुक्ल, प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैदू, कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला, विधायक अंबिका मरकाम, जनक ध्रुव, सावित्री मंडावी, गुरुमुख सिंह होरा, महामंत्री सकलेन कामदार, संयुक्त महामंत्री अशोक राज आहूजा, वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर, घनश्याम राजू तिवारी, सुरेंद्र वर्मा, प्रवक्ता सत्य प्रकाश सिंह उपस्थित थे।




