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छत्तीसगढ़

बसना के सिद्देश्वर शिव मंदिर धाम में उतरा ‘शिवलोक’, विधायक डॉ. संपत अग्रवाल के सानिध्य में संपन्न हुई भव्य रुद्रपूजा

बसना। बसना की पावन माटी कल एक ऐसे आध्यात्मिक गौरव की साक्षी बनी, जिसने त्रेतायुग के उस दिव्य दृश्य को जीवंत कर दिया जब संतों के आगमन से संपूर्ण नगर हर्षित हो उठता था। स्थानीय विधायक डॉ. संपत अग्रवाल के विशेष प्रयासों और कुशल नेतृत्व में आयोजित ‘सोमनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन, रुद्रपूजा एवं सत्संग’ के महाकुंभ ने बसना को ‘लघु कैलाश’ के रूप में परिवर्तित कर दिया।

देवों के देव महादेव की ऊर्जा के केंद्र बैजनाथ धाम से पधारे सिद्ध संतों और सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की दिव्य प्रतिमा के आगमन ने वातावरण में एक अलौकिक ऊर्जा का संचार किया। विधायक कार्यालय से प्रारंभ होकर सिद्देश्वर शिव मंदिर तक फैली इस आध्यात्मिक लहर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े। मृदंग, शंख और डमरू की मंगल ध्वनि के बीच जब रुद्रपूजा रुद्राभिषेक के साथ प्रारंभ हुई, तो संपूर्ण परिसर महादेव के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।

क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने एक समर्पित यजमान की भांति इस भव्य आयोजन का नेतृत्व किया। उन्होंने न केवल इस अनुष्ठान की रूपरेखा तैयार की, बल्कि स्वयं उपस्थित रहकर प्रत्येक श्रद्धालु का आदर-सत्कार किया। इस अवसर पर विधायक डॉ. अग्रवाल ने कहा कि जब भक्त सच्चे मन से शिव का आह्वान करते हैं, तो महादेव सूक्ष्म रूप में वहां विराजमान होते हैं। सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन और श्री श्री रविशंकर जी के आध्यात्मिक आशीर्वाद की आभा ने आज बसना को धन्य कर दिया है।

वहीं, कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाते हुए भाजपा आर्थिक प्रकोष्ठ के जिला संयोजक सुमित अग्रवाल ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि राजनीति के साथ धर्म और संस्कृति का यह सामंजस्य समाज में नई चेतना और समृद्धि का संचार करेगा।

सत्संग के दौरान शिव भजनों की प्रस्तुति पर भक्त भाव-विभोर होकर झूमते नजर आए। श्रद्धा और चेतना के इस समागम में क्षेत्र के प्रबुद्ध जन, विधायक परिवार के सदस्य और भारी संख्या में मातृशक्ति उपस्थित रही। अनुष्ठान की पूर्णता के पश्चात ‘अन्नपूर्णा’ के आशीर्वाद स्वरूप विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जहाँ हजारों श्रद्धालुओं ने अत्यंत प्रेम और श्रद्धा के साथ महाप्रसाद ग्रहण किया।

इस गरिमामयी अवसर पर भाजपा आर्थिक प्रकोष्ठ के जिला संयोजक सुमित अग्रवाल ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे क्षेत्र के लिए एक युगांतरकारी घटना बताया। उन्होंने विस्तार देते हुए कहा कि विधायक डॉ. संपत अग्रवाल जी का यह प्रयास केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि हमारी विलक्षण सनातनी विरासत और आधुनिक पीढ़ी के बीच वैचारिक जुड़ाव का माध्यम है। राजनीति जब धर्म और जनसेवा के साथ एकाकार होती है, तभी समाज में सर्वांगीण सुख और शांति का मार्ग प्रशस्त होता है। आज बसना ने न केवल भगवान सोमनाथ के दर्शन किए, बल्कि अपनी उस महान गौरवशाली संस्कृति को भी पहचाना जो विज्ञान और श्रद्धा की पराकाष्ठा है।

यह आयोजन डॉ. संपत अग्रवाल के उस संकल्प की सिद्धि के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ वे राजनीति को धर्म और जनसेवा के मार्ग से जोड़ते हैं। क्षेत्र में उनके इस ‘भगीरथ प्रयास’ की चौतरफा सराहना हो रही है। संतों के सानिध्य और सोमनाथ की छाया में बसना की जनता ने जो आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त की है, वह इस क्षेत्र की चेतना में लंबे समय तक अमिट रहेगी।

*सोमनाथ शिवलिंग का अनकहा रहस्य*

आपको बता दे कि सनातन संस्कृति के गौरव और आस्था के प्रतीक प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान सोमनाथ के शिवलिंग को लेकर कई ऐसे रहस्य हैं, जो आज भी विज्ञान और श्रद्धा के बीच एक सेतु का कार्य करते हैं।

भगवान सोमनाथ के प्राचीन ज्योतिर्लिंग का इतिहास सतयुग से लेकर वर्तमान तक श्रद्धा और विज्ञान के अद्भुत संगम को दर्शाता है। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार, महमूद गजनी के आक्रमण के बाद मंदिर के पुरोहितों ने खंडित अवशेषों को बचाकर गुप्त रूप से 11 बाण शिवलिंगों के रूप में उनकी पूजा जारी रखी, जिन्हें कांची शंकराचार्य की भविष्यवाणी के अनुरूप जनवरी 2025 में श्री श्री रविशंकर जी को सौंपा गया।

वैज्ञानिक दृष्टि से यह शिवलिंग अत्यंत विलक्षण है, क्योंकि इसकी रासायनिक संरचना में 80% बेरियम जैसे तत्व शामिल हैं और भूवैज्ञानिकों के अनुसार इसमें ऐसी सामग्री का उपयोग हुआ है जो पृथ्वी पर दुर्लभ है। इसकी यही अद्वितीय संरचना और चुंबकीय गुण प्राचीन काल में इसे बिना किसी आधार के हवा में स्थित रखते थे, जो आज भी शोध का विषय है।

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