बजट सत्र की अवधि में कटौती, नेता प्रतिपक्ष महंत बोले- जनता के हित में ज्यादा बात रखने की जरूरत, 25 दिन का होना चाहिए सत्र

रायपुर। नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने बजट सत्र को लेकर बयान दिया है. नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत के अनुसार बजट सत्र करीब 25 दिन का होना चाहिए. महंत ने कहा कि बजट सत्र हर बार करीबन 25 दिन का होता है, पर इस बार कटौती कर दी गई, जिसके चलते हमे रात दस–दस बजे तक बैठना पड़ा है. महंत ने कहा कि हमें जनता के हित के लिए सत्र में ज्यादा बात रखने की जरूरत है, इसलिए सत्र भी बड़ा होना चाहिए.
चरण दास महंत ने कहा कि बजट सत्र 25 दिन का होना चाहिए,30 दिन का होना चाहिए. पहली बार ऐसी घटना हुई है कि सत्र में कटौती कर दिया गया और हमारे साथियों को 15 दिन ही बात रखने का अवसर मिला. हमारे लोगों को 10 बजे तक बैठना पड़ा. कभी 10:30 बज गया, तो कभी 9:30 बज गया. जो अतिरिक्त समय बैठना पड़ा, वह नहीं बैठना पड़ता. हमारे साथियों को अपने क्षेत्र के बारे में, विभागों के बारे में वहां जो गलत काम हो रहे हैं, भ्रष्टाचार हो रहा हैं, अधिकारी लोग जो गलत काम कर रहे हैं और सही व्यवहार नहीं कर रहे है, कांग्रेसियों की सुन नहीं रहे है, केवल भाजपाइयों के काम हो रहे है. गांवों में पैसा नहीं है, मनरेगा का नाम बदल कर जो काम कर रहे है, उसमें भी पैसा नहीं है. इन सब बातों को हमें रखना पड़ता है. हम विपक्षी दल के लोग हैं, तो हमें सत्र में ज्यादा भाग लेने की जरूरत है. अपनी बात रखने की जरूरत है. इसलिए सत्र का समय ज्यादा होना चाहिए था.
खाड़ी देश में युद्ध का असर
चरण दास महंत ने कहा कि खाड़ी युद्ध के चलते पेट्रोल–डीजल के दाम और बढ़ेंगे. अभी तक हम लोग जो चिल्ला रहे है कि गैस के दाम बढ़ गए हैं, गैस नहीं मिल रहा है तो उसको सरकार के लोग मजाक में ले रहे है. देश के अंदर गैस को लेकर हाहाकार मचा हुआ है. लोगो को बिजली से चलने वाला यंत्र भी नहीं मिल पा रहा है और खेतों से लकड़ी की कटाई भी बंद है, इसलिए आगे चलकर त्राहि–त्राहि मचने वाला है. आजकल दुकानों में पापड़ देना बंद कर दिया गया है, समोसा बनाना बंद कर दिया है. भजिया, आलू गुंडा खिलाना बंद कर दिया है. महंत ने एक वाक्ये को शेयर करते हुए कहा कि कल ही मेरा एक दोस्त आया था, उसने बताया कि मैं दिल्ली के एक बड़े होटल में सूप पीने गया था,वहां सूप 500 रुपए का आता है, होटल वालों ने कहा कि भैया हम सूप नहीं बना सकते. तो उसने कहा दाल-भात खिला दो, और फिर दाल-भात खाकर आया. महंत ने कहा कि यह यही का नहीं दिल्ली में भी यही हाल है. सब जगह का यही हाल है. कालाबाजारी करने वाले अपने घर और ऑफिस में गैस डंप कर रहे हैं, जिसमें सरकार को कार्यवाही करनी चाहिए.
महंत ने कहा कि सरकार के लोगों को कमी महसूस इसलिए नहीं होती क्योंकि सरकार के पीए लोग फोन करते हैं और उन्हें गैस सिलेंडर मिल जाता है,जबकि हम लोग लाइन लगाते हैं फिर भी हमें नहीं मिलता. जिस दिन सरकार के लोगों को पीए–पीएस के फोन करने के बाद भी नहीं मिलेगा तब उन्हें कमी महसूस होगी.
सभी जगह की मूर्ति में एकरुपता नहीं : नेता प्रतिपक्ष महंत
चन्द्रखुरी की राम जी की प्रतिमा को लेकर नेता प्रतिपक्ष डॉ चरण दास महंत ने बयान दिया कि उस मूर्ति में उनकी आभा और उनके चरित्र को हम याद करते हैं. महंत ने कहा कि यह आस्था का प्रश्न है, मूर्ति में कुछ नहीं रखा है. सभी जगह की मूर्ति में एकरुपता नहीं है.
महंत ने कहा कि मैंने दो दिन पहले भी सरकार से कहा था कि ढाई साल बीत गए हैं, ढाई साल और बचे हैं. इसमें जनता के काम करना चाहिए, हमारी सरकार की गलतियां नहीं गिनाते रहना चाहिए. प्रदेश के लिए अच्छा करें,हमें आपत्ति थोड़ी है. कहीं ऐसा ना हो कि ढाई साल बाद उधर के लोग इधर आ जाए और इधर के लोग उधर चले जाए. चुनाव में जीत– हार सरकार बनाना चलता रहता है. हमारे जाने के बाद भी चलेगा,उनके जाने के बाद भी चलेगा. इधर वाले उधर बैठेंगे उधर वाले इधर बैठेंगे पर सभी दोबारा रिपीट हो ऐसा संभव नहीं है. इसलिए जो 5 साल मिले हैं उसका किस रूप में उपयोग करें, कैसा काम करें यह देखना चाहिए.
अफीम की खेती पर महंत का बयान
अफीम की खेती को लेकर महंत ने कहा कि हमें पहले से मालूम है कि जशपुर में,रायगढ़ में,कोरबा के ग्रामीण क्षेत्रों में गांजा की खेती होती है. अब वह अफीम में परिवर्तित हुआ है. मैं कह नहीं सकता कि वह अभी हुआ है कि 4 साल बाद हुआ है कि 3 साल बाद हुआ है. अभी अफीम की खेती तमनार में हो गया, बलरामपुर में हो गया सरगुजा में हो गया कवर्धा में हो गया अभी और देखते रहिए. मैंने सरकार से कहा है कि आजकल सैटेलाइट का जमाना है तो सेटेलाइट में देख लीजिए और जहां-जहां अफीम की खेती हो रही है या तो उसे जला दीजिए या फिर उसे खत्म कर दीजिए या इससे भी आगे बढ़कर मैंने कहा है कि या आप इनको करवाना चाहते हैं खेती तो लाइसेंस दे दीजिए. अभी भी देश के विभिन्न हिस्सों मध्य प्रदेश में मंदसौर हो गया, भिंड हो गया और उत्तर प्रदेश में अफीम की खेती होती है. अफीम की खेती के अलग से नियम है. खेती करने वाला एक अंश एक दाना भी अपने पास नहीं रख सकता वह सरकार को देता है.




