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छत्तीसगढ़

तहसीलदारों को पदोन्नति का मौका: डिप्टी कलेक्टर भर्ती में फिर लागू हुआ 50/50 फॉर्मूला

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के सत्र के दौरान प्रशासनिक पदों पर भर्ती और पदोन्नति को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई। कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव ने राज्य में डिप्टी कलेक्टर के रिक्त पदों और पदोन्नति की प्रक्रिया को लेकर सरकार से सवाल पूछा। उन्होंने जानना चाहा कि वर्तमान में राज्य में डिप्टी कलेक्टर के कितने पद खाली हैं और क्या इन पदों की पूर्ति सीधी भर्ती और पदोन्नति दोनों माध्यमों से की जाती है।

विधानसभा में इस सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया कि वर्तमान समय में राज्य में डिप्टी कलेक्टर के कुल 42 पद रिक्त हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि डिप्टी कलेक्टर के पदों की पूर्ति सीधी भर्ती और पदोन्नति दोनों माध्यमों से की जाती है।मुख्यमंत्री ने बताया कि तहसीलदार से डिप्टी कलेक्टर के पद पर पदोन्नति के लिए 40 प्रतिशत का अनुपात निर्धारित किया गया है। इसके तहत योग्य और अनुभवी तहसीलदारों को पदोन्नति देकर डिप्टी कलेक्टर बनाया जाता है।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि वर्ष 2001 से लेकर वर्ष 2025 तक कुल 336 अधिकारियों को डिप्टी कलेक्टर के पद पर पदोन्नत किया जा चुका है। यह पदोन्नतियां समय-समय पर निर्धारित नियमों और अनुपात के अनुसार की गई हैं।मुख्यमंत्री ने बताया कि पदोन्नति के अनुपात में समय-समय पर बदलाव भी हुआ है। वर्ष 2001 से 2020 तक डिप्टी कलेक्टर पदों की पूर्ति सीधी भर्ती और पदोन्नति के 50/50 अनुपात में की जाती थी। यानी आधे पद सीधे भर्ती से और आधे पद पदोन्नति के माध्यम से भरे जाते थे।

हालांकि वर्ष 2021 से 2025 के बीच यह अनुपात बदलकर 60/40 कर दिया गया था। इस अवधि में 60 प्रतिशत पद सीधी भर्ती के माध्यम से और 40 प्रतिशत पद तहसीलदारों को पदोन्नति देकर भरे गए।विधानसभा में पूछे गए सवाल के दौरान विधायक अटल श्रीवास्तव ने यह भी जानना चाहा कि क्या वर्तमान में डिप्टी कलेक्टर पदों की पूर्ति के लिए सीधी भर्ती और पदोन्नति का 50/50 अनुपात लागू किया गया है या इसे लागू करने के लिए कोई प्रस्ताव लंबित है।

इस पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया कि सीधी भर्ती और तहसीलदार से पदोन्नति के लिए 50/50 अनुपात लागू करने के संबंध में 20 फरवरी 2026 को अधिसूचना जारी कर दी गई है। इस अधिसूचना के बाद अब दोनों माध्यमों से बराबर-बराबर पदों की पूर्ति करने का रास्ता साफ हो गया है।सरकार के इस निर्णय को प्रशासनिक संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जहां एक ओर योग्य उम्मीदवारों को सीधी भर्ती के माध्यम से अवसर मिलेगा, वहीं लंबे समय से सेवा दे रहे तहसीलदारों को भी पदोन्नति का उचित मौका मिल सकेगा।

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