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रेलगाड़ी प्रबंधकों को मिला परिचालन महत्व का औपचारिक सम्मान, सांसद बृजमोहन अग्रवाल के प्रयासों से 30 हजार कर्मचारियों को राहत की उम्मीद

नई दिल्ली/रायपुर।  रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने बुधवार को लोकसभा में रेलगाड़ी प्रबंधकों (पूर्व में गार्ड) की कैरियर प्रगति, वेतन विसंगतियों और पदोन्नति से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों को प्रभावशाली ढंग से उठाकर एक बार फिर कर्मचारियों के हितों के प्रति अपनी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता सिद्ध की।

श्री अग्रवाल ने छठे और सातवें केंद्रीय वेतन आयोग से उत्पन्न वेतन विसंगतियों, रेलगाड़ी प्रबंधकों की सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण भूमिका, भारतीय रेल स्थापना नियमावली के अनुरूप कैरियर प्रगति तथा आगामी आठवें केंद्रीय वेतन आयोग में प्रवेश स्तर के वेतन एवं पदोन्नति वेतनमानों के उन्नयन जैसे विषयों पर तथ्यपूर्ण और दूरदर्शी प्रश्न रखे।

सांसद बृजमोहन के प्रश्नों के उत्तर में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारतीय रेल, रेलगाड़ी प्रबंधकों को एक महत्वपूर्ण संरक्षा श्रेणी के रूप में मान्यता देती है, जिनकी भूमिका सुरक्षित, सुचारु और कुशल रेल परिचालन में केन्द्रीय है। मंत्री ने यह भी बताया कि 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जा चुका है, अतिरिक्त भत्ते स्वीकृत किए गए हैं, पदोन्नति से जुड़े अवरोधों को दूर करने हेतु हालिया प्रशासनिक आदेश जारी किए गए हैं तथा कैरियर प्रगति के अवसरों का विस्तार किया गया है।

भारतीय रेलवे के लगभग 30,000 ट्रेन मैनेजरों की लंबे समय से चली आ रही शिकायतों को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, रेल मंत्रालय ने औपचारिक रूप से उनके परिचालन महत्व को स्वीकार किया है और करियर में प्रगति के लिए नए उपायों की रूपरेखा तैयार की है। यह कदम रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल के औपचारिक प्रतिवेदन के बाद उठाया गया है.

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ट्रेन मैनेजर (जिन्हें पहले ‘गार्ड’ के नाम से जाना जाता था) एक अत्यंत महत्वपूर्ण ‘सेफ्टी-क्रिटिकल’ श्रेणी हैं। उनकी जिम्मेदारियों में ट्रेन की अखंडता सुनिश्चित करना, लोको पायलट और स्टेशन कर्मचारियों के साथ समन्वय करना और आपातकालीन स्थितियों को संभालना शामिल है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जोर देकर कहा कि ये कार्य पूरी तरह से परिचालन (Operational) से जुड़े हैं और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) जैसे सुरक्षा कर्मियों द्वारा निभाए जाने वाले कानून-व्यवस्था के कर्तव्यों से बिल्कुल अलग हैं। यह स्पष्टीकरण AIGC की उस मुख्य शिकायत का समाधान करता है, जिसमें तर्क दिया गया था कि “गार्ड” पदनाम के कारण इस भूमिका को गलती से सुरक्षा गार्डों के बराबर मान लिया गया था।

बता दें कि 11 जनवरी 2026 को ऑल इंडिया गाईस काउंसिल (AIGC) के प्रतिनिधि मंडल ने सांसद बृजमोहन अग्रवाल से भेंट कर ट्रेन मैनेजरों (गार्डों) के संबंध में छठे और सातवें केंद्रीय वेतन आयोग (CPC) से उत्पन्न वेतन विसंगतियों के निवारण की मांग की थी।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने इस विषय को सदन में उठाकर यह सुनिश्चित किया कि देशभर के हजारों रेलगाड़ी प्रबंधकों की जायज़ मांगें नीति-निर्माण के केंद्र में आएं। यह पहल न केवल कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाने वाली है, बल्कि रेलवे की सुरक्षा और परिचालन दक्षता को भी सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

बृजमोहन अग्रवाल का कहना है कि, “राष्ट्रीय गतिशीलता और सुरक्षा में इन पेशेवरों द्वारा निभाई जाने वाली महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए, ट्रेन मैनेजर रेलवे की रीढ़ की हड्डी हैं।”

रेल कर्मचारियों और यूनियनों ने सांसद बृजमोहन अग्रवाल के इस प्रयास का स्वागत करते हुए कहा कि वे लगातार जमीनी मुद्दों को संसद तक पहुंचाने वाले जनप्रतिनिधि हैं। यह प्रश्नोत्तर उनकी कर्मचारी-हितैषी सोच, गहन अध्ययन और प्रभावी संसदीय हस्तक्षेप का सशक्त उदाहरण है।

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