टेंडर विवाद : मुख्यमंत्री कन्या विवाह समारोह पर फंसा पेंच, महिला बाल विकास विभाग ने कार्य को लेकर लिखी चिट्ठी, PWD ने किया इंकार!

रायपुर। राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में 10 फरवरी को होने वाले मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह समारोह विवादों में घिरता जा रहा है। कांग्रेस ने इस आयोजन में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है और सवाल उठाते हुए कहा है कि कार्यक्रम के लिए पंडाल आदि के लिए वर्कआर्डर जारी होने से पहले ही काम शुरू हो गया है। कांग्रेस के सवाल उठाने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने अपने निर्णय पलटते हुए एम्पैनलड वेंडर की जगह अब पीडब्ल्यूडी को एजेंसी बनाकर प्रस्ताव भेजा है कि आगे का सारा कार्य पीडब्ल्यूडी विभाग अपनी दर के आधार पर करें और महिला बाल विकास विभाग उन्हें पेमेंट करेगा।
इस मामले में PWD के संबंधित अधिकारियों से हमने संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। वहीं सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पीडब्ल्यूडी विभाग ने महिला बाल विकास विभाग को पत्राचार करते हुए सीधे तौर पर काम करने में असमर्थता जता दी है।

बता दें कि गुरुवार को कांग्रेस ने प्रेस कांफ्रेंस कर मामले का खुलासा किया था। सुबोध हरितवाल ने कहा था कि 10 फरवरी को साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में भारी अनियमितताएं सामने आई है। इस आयोजन के लिए निविदा (टेंडर) प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, जबकि नियमानुसार CSIDC के माध्यम से कंपनियों से निविदा आमंत्रित की जाती है। उन्होंने कहा कि 4 फरवरी को सिर्फ 5 कंपनियों को आमंत्रित किया गया और उन्हें 24 घंटे के भीतर डिजाइन प्रेजेंटेशन के साथ प्रस्तुत होने को कहा गया। सुबोध हरितवाल ने सवाल उठाया कि ऐसा कौन-सा डिजाइन और लेआउट है, जो पहले से ही पास हो चुका है।
सुबोध ने कहा था – जंबूरी जैसा हो रहा भ्रष्टाचार
कांग्रेस नेता सुबोध ने आरोप लगाया था कि बिना टेंडर के साइंस कॉलेज मैदान में काम शुरू हो चुका है, जबकि इस आयोजन पर 5 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च बताया जा रहा है। उन्होंने कहा था कि यदि किसी आयोजन में 4–5 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं और निविदा प्रक्रिया नहीं अपनाई गई तो यह स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार है। सुबोध ने इसे “जंबूरी भ्रष्टाचार 2.0” करार देते हुए कहा कि जैसे जंबूरी मामले में अनियमितताएं सामने आई थी, वैसे ही इस मामले में भी गड़बड़ी हुई है।
पीडब्ल्यूडी को पत्र लिखने पर कांग्रेस ने फिर उठाया सवाल
कांग्रेस के सवाल उठाने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने अपने निर्णय पलटते हुए एम्पैनलड वेंडर की जगह अब पीडब्ल्यूडी को एजेंसी बनाकर प्रस्ताव भेजा है कि आगे का सारा कार्य पीडब्ल्यूडी विभाग अपनी दर के आधार पर करें और महिला बाल विकास विभाग पेमेंट उन्हें करेगा। इस पर सुबोध हरितवाल ने कहा है कि सवाल फिर खड़े होता है कि ये क्यों करना पड़ा, आखिर ऐसी क्या मजबूरी आ गई कि प्रक्रिया को रद्द करते हुए आनन-फानन में पीडब्ल्यूडी को एजेंसी बनाने का निर्णय लिया गया, जबकि कार्यक्रम में सिर्फ 4 दिन बाकी है और इससे बड़ा सवाल ये है कि क्यों पीडब्ल्यूडी विभाग ने कार्य को सीधे तौर पर खारिज करते हुए असमर्थता जाहिर कर दी। सुबोध हरितवाल ने कहा कि इस पूरे प्रकरण से ये साफ तौर पर स्थापित होता है कि महिला बाल विकास विभाग कही न कही भ्रष्टाचार में लिप्त है और अब लीपापोती की तैयारी में लगा हुआ है परंतु दूसरे विभाग इनके कृत्य में शामिल होने से साफ बचते हुए नजर आ रहे हैं।




