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जेल में वसूली गिरोह चला रहे प्रहरी को पुलिस ने किया गिरफ्तार, सरगना के 5 मददगार पहले ही हो चुके हैं अरेस्ट

सुविधाओं के नाम पर कैदियों के परिजनों से मंगाते थे रकम

दुर्ग। सेंट्रल जेल दुर्ग में कैदियों को सुविधाएं देने के नाम पर उनके परिजनों से वसूली करने वाले गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। इस गिरोह का सरगना यहां तैनात जेल प्रहरी दिवाकर सिंह पैकरा था, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि वसूली गिरोह के 5 सदस्यों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। इस मामले में पद्मनापुर थाने की पुलिस ने कार्रवाई की है।कैदी के दोस्त ने की थी शिकायत

इस मामले का खुलासा करते हुए एएसपी पद्मश्री तंवर ने बताया कि नेवई मरोदा टैंक मार्केट लाइन निवासी हनुमान नायक उर्फ हनु की शिकायत पर जांच की गई थी। विचाराधीन बंदी संदीप वासनिक ने जेल के अंदर से अपने दोस्त हनु को फोन कर जानकारी दी। उसे मोबाइल पर बोला गया कि जेल में सुविधा के लिए पैसे देना पड़ेगा। नहीं देने पर प्रताड़ित किया जाएगा। तब हनु ने पूछा किस नंबर पर कॉल आया था। नंबर बताने पर हनु ने उस नंबर पर कॉल किया और पैसे देने की बात कही। हनु ने फोन-पे के माध्यम से आरोपी प्रतीक वासनिक और जेल प्रहरी दिवाकर सिंह पैकरा को पैसा भेजा। पैसा भेजने के बाद पुलिस में शिकायत की।

ऑनलाइन पैसे लेकर फंसा जेल प्रहरी

शिकायत मिलने पर पद्मनाभपुर पुलिस ने जेल प्रशासन के सहयोग से मामले की जांच की। जेल प्रहरी दिवाकर सिंह पैकरा से पूछताछ कर मोबाइल की जांच की गई। फोन-पे के माध्यम से रकम लेने की पुष्टि हुई। पूछताछ में खुलासा हुआ कि जेल में निरूद्ध बंदी संदीप वासनिक व्दारा आरोपी प्रतीक वासनिक के माध्यम सेे पैसा भिजवाया गया है। जेल प्रहरी दिवाकर सिंह पैकरा ने स्वीकार किया कि उसने जेल में सामान पहुंचाने और सुविधा मुहैय्या कराने के एवज में पैसा लिया। फोन-पे पर रकम आना पाया गया। जेल प्रहरी के खिलाफ साक्ष्य पाए जाने पर उसके मोबाइल फोन और स्टेटमेंट को जब्त किया किया।

पूरा गिरोह चला रहा था प्रहरी

आरोपी जेल प्रहरी के खिलाफ धारा 308(2), 308 (5), 111 (2) (ख), 3.5 के तहत प्रकरण दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इस मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों इसराइल कुमार, अजय दीवान, प्रतीक वासनिक, संजय वासनिक और लोकेश्वरी साहू को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जिन पांच लोगों को पहले गिरफ्तार कर जेल भेजा गया उनका जेल से कोई ताल्लुकात नहीं लेकिन वे प्रहारी के साथ हैं। जेल प्रहरी दिवाकर सिंह पैकरा इनके माध्यम से पैसा मंगाता था। जेल में कोई नया बंदी आने पर उनके घरवालों को फोन कर पैसे की उगाही की जाती थी। जेल में पैसा उगाही का इस तरह का मामला नया नहीं है। बताया जाता है कि पैसा देने वाले बंदियों को वहां सारी सुविधाएं मिलती है। जो पैसा नहीं देते, उनसे मारपीट कर उनको परेशान किया जाता है।

गौरतलब है कि इस तरह का मामला प्रदेश की दूसरी जेलों में भी सामने आ चुका है। इस तरह मामला न केवल जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि जेल सुधारों की सख्त जरुरत की ओर भी सरकार का ध्यान आकृष्ट करता है।

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