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नक्सलियों का दवाइयों का जखीरा पकड़ाया, CRPF की बड़ी सफलता—217वीं बटालियन ने जंगल में पकड़ा डंप

सुकमा। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। सीआरपीएफ की 217वीं बटालियन के जवानों ने सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखा गया दवाइयों का एक बड़ा डंप बरामद किया है। यह कार्रवाई नक्सल गतिविधियों पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

यह अभियान सीआरपीएफ छत्तीसगढ़ सेक्टर के पुलिस महानिरीक्षक  शालीन के मार्गदर्शन, पुलिस उप महानिरीक्षक (परिचालन रेंज कोण्टा)  राजेश पांडे और 217वीं बटालियन के कमांडेंट  विजय शंकर के निर्देशन में चलाया गया। इस ऑपरेशन का नेतृत्व सहायक कमांडेंट रवि शर्मा ने किया। अभियान में सी/217 और डी/241 बटालियन के जवानों ने संयुक्त रूप से हिस्सा लिया।

जानकारी के अनुसार, जवानों द्वारा वीरम गांव के पास जंगलों में कॉम्बिंग और सर्च अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान एक छोटी पहाड़ी (टेकरी) के पास संदिग्ध वस्तुओं का ढेर दिखाई दिया। सुरक्षा के मद्देनजर तुरंत बीडीडीएस (बम डिस्पोजल एंड डिटेक्शन स्क्वाड) टीम को मौके पर बुलाया गया। पूरी सावधानी के साथ क्षेत्र की तलाशी ली गई, जिसमें भारी मात्रा में दवाइयां और अन्य सामग्री बरामद की गई।

बरामद सामग्री में करीब 6 किलोग्राम ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड इंजेक्शन (50 mg/ml), दर्द निवारक दवाइयां, संक्रमण से संबंधित दवाएं जैसे फ्लुकोनाजोल और डॉक्सीडैन, तथा लगभग 10 किलोग्राम फिटकरी शामिल हैं। इन दवाइयों की मात्रा और प्रकार को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि इन्हें नक्सलियों द्वारा अपने इलाज और आपातकालीन उपयोग के लिए जमा किया गया था।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस तरह के डंप नक्सलियों के मेडिकल सपोर्ट सिस्टम का हिस्सा होते हैं, जिनका इस्तेमाल वे घायल साथियों के इलाज के लिए करते हैं। साथ ही, यह भी संभावना जताई जा रही है कि इन दवाइयों के माध्यम से नक्सलियों के स्थानीय समर्थन नेटवर्क और उनकी गतिविधियों के बारे में और अधिक जानकारी हासिल की जा सकती है।

अभियान के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि पूरे ऑपरेशन में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई और सभी जवान सुरक्षित अपने कैंप लौट आए। यह ऑपरेशन न केवल सुरक्षा बलों की सतर्कता और रणनीतिक कौशल को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि नक्सलियों के नेटवर्क को लगातार कमजोर किया जा रहा है।

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