कांग्रेस ने उठाया जंबूरी में भ्रष्टाचार का मुद्दा, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने आरोप को नकारते हुए जांच से किया इंकार, विपक्ष ने किया वॉकआउट…

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को प्रश्नकाल की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने जम्बूरी में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए विधानसभा की समिति से जांच कराने की मांग की. स्कूल शिक्षामंत्री गजेंद्र यादव ने भ्रष्टाचार के आरोपों को नकारते हुए जांच से इंकार कर दिया. मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन से वॉकआउट किया.
कांग्रेस विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह ने प्रश्नकाल में उठाया बालोद जिले में जंबूरी आयोजन में अनियमितता का मामला. उन्होंने सवाल किया कि क्या कर्णिका 17.1 में शिक्षा मंत्री को पदेन करने के लिए संशोधन किया गया है? तो कब किया गया है?
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन होने के बाद प्रथम शिक्षा मंत्री सत्यनारायण शर्मा रहे छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने उस टाइम एक प्रस्ताव पारित किया कि स्काउट-गाइड के लिए अध्यक का चुनाव किया जाए. डॉ रमन सिंह जब तक रहे तब तक वह प्रक्रिया लगातार चली, जब कांग्रेस की सरकार आई तब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस प्रक्रिया को समाप्त कर दिया गया. उसके बाद मुख्यमंत्री द्वारा अनुमोदित व्यक्ति ही अध्यक्ष रहेगा, यह नई प्रक्रिया शुरू की गई.
विधायक ने इस पर सवाल किया कि 10 तारीख को जो टेंडर निकाला, उसका टेंडर कब निकला? किसकी अध्यक्षता में निकला?आपकी नियुक्ति 13 दिसंबर 2025 को हुई और टेंडर अलग डेट पर निकला, तो आखिर किसके आदेश अनुसार टेंडर निकाला गया? मंत्री ने बताया कि जंबूरी का जो निर्णय हुआ, उस समय जो कार्यक्रम प्रशिक्षण देखते थे. जब नेशनल के आयुक्त निर्देशक जगह देखने आते थे, तब उन्होंने कलेक्टर के साथ बैठक कर ली थी.
विधायक ने सवाल किया कि 10 तारीख से पहले टेंडर किसके कहने से पास हो गया? उस समय अध्यक्ष कौन था? क्योंकि 13 दिसबंर 25 की आपकी चिठ्ठी है?
मंत्री ने बताया कि 13 दिसंबर 25 को राज्य शासन ने जो चिठ्ठी लिखी, उसमें राज्य के उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में बैठक हुई थी. टेंडर प्रक्रिया शासन के कलेक्टर के अंदर थी. शासन की प्रक्रिया कभी किसी के रहने, ना रहने से नहीं रुकती है. जिस दिन स्कूल शिक्षा मंत्री पदभार ग्रहण करता है, उस दिन से वह पदेन हो जाता है. राज्य कार्यकारिणी का जो परिषद है, उसके द्वारा ही अनुमति दी गई. टेंडर हमने नहीं किया.
विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह ने इस पर कहा कि पहला टेंडर 10 दिसंबर 25 तारीख को लगा था, उसे निरस्त कर दूसरा टेंडर 23 दिसंबर 25 को किया गया. साथ ही जंबूरी के आयोजन को लेकर 90 बिंदु थे, उसे 52 कर दिया गया. 4 तारीख को टेंडर वापस खुलता है, ये कैसे पॉसिबल है?
इस पर भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला ने टिप्पणी की कि वैसे ही जैसे बोर बासी के समय में अपने आप टेंडर हो जाता है. बोरे-बासी के मुद्दे को प्रश्नकाल में उठाने पर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच हंगामा मच गया. विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह ने इस पर सवाल किया कि क्या इसे टेंडर के पहले काम करने की प्रक्रिया की विधायक दल की समिति से जांच कराएंगे? मंत्री ने स्पष्ट किया कि नेशनल का कार्यक्रम था. हमारा पार्ट अलग था. नेशनल का कार्यक्रम अलग था, इसमें जो प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री लेवल का कार्य कर चुका, चाहे वही इसमें भाग लिया है.
विधायक ने इस पर दोहराया कि कि क्या टेंडर के पहले काम शुरू होने पर विधासभा की पर जांच कमेटी से इसकी कराएंगे? मंत्री ने कहा कि जांच वहां पर होता है, जहां पर कुछ घोटाला हो या गोलमाल हो. इस पर विधायक कुंवर सिंह निषाद ने कहा कि 20 दिसंबर की तारीख टेंडर प्रक्रिया की थी, बिना बीड खोले निर्माण कार्य कैसे शुरू हो जाता है? और क्या इसकी राशि डीईओ के खाते में जमा की जा सकती है?
मंत्री ने इस पर कहा कि हमारे पार्ट का काम 10 तारीख से हुआ था, और डीईओ के खाते में पैसा नहीं देंगे, तो किसके खाते में पैसा डालेंगे. इस पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने कहा कि मंत्री जी लगातार बात को घुमा रहे हैं. इस बार भी हमे संतुष्टिजनक जवाब नहीं मिल रहा है, इसलिए सदन से बर्हिगमन करते हैं.




