
रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा उप मुख्यमंत्री अरुण साव की तुलना बंदर से किए जाने वाले बयान पर सियासी घमासान मच गया है। भाजपा नेताओं की ओर से लगातार तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, वहीं समाजिक संगठनों ने भी इस बयान को लेकर नाराजगी जाहिर की है।
दरअसल, तीन दिन पहले बिलासपुर के लिंगियाडीह में एक जनसभा को संबोधित करते हुए भूपेश बघेल ने उप मुख्यमंत्री अरुण साव की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने कहा था कि अरुण साव केवल “उछल-कूद करने वाले बंदर की तरह” हैं और दो साल में सिर्फ 950 मीटर सड़क ही बनवा पाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उप मुख्यमंत्री किसी भी क्षेत्र में कोई ठोस काम नहीं कर पा रहे हैं। यह बयान अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
अरुण साव का जवाब: भाषा की होनी चाहिए मर्यादा
इस पूरे विवाद पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राजनीति में आलोचना स्वाभाविक है, लेकिन भाषा की एक मर्यादा होती है। अरुण साव ने कहा कि भूपेश बघेल प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और उनसे ऐसी भाषा की उम्मीद नहीं की जाती।उन्होंने साफ कहा कि इस तरह की भाषा राजनीति में अक्षम्य है और सभी नेताओं को अपने शब्दों पर संयम रखना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि व्यक्तिगत टिप्पणी से राजनीतिक विमर्श का स्तर गिरता है।
साहू समाज ने भी खोला मोर्चा
भूपेश बघेल के बयान के बाद छत्तीसगढ़ साहू समाज भी आक्रोशित नजर आ रहा है। समाज ने इस टिप्पणी को अपमानजनक बताते हुए सभी जिलों में पुलिस अधीक्षकों को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया है। साहू समाज का कहना है कि यह कदम पूर्व मुख्यमंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मंगवाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि उप मुख्यमंत्री अरुण साव पर की गई टिप्पणी पूरे समाज की भावनाओं को आहत करने वाली है और इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।





