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छत्तीसगढ़

हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त पुलिस इंस्पेक्टर को दी राहत, कहा- शासकीय कर्मचारी को सेवाकाल के दौरान किए गए अधिक वेतन भुगतान की नहीं हो सकती वसूली…

रायपुर। पूर्व सेवाकाल के दौरान पुलिस निरीक्षक की वेतनवृद्धि की गणना गलत तरीके से किए जाने के आधार पर अधिक वेतन भुगतान का हवाला देकर की गई वसूली को लौटाने का आदेश हाई कोर्ट ने पुलिस अधीक्षक को दिया है.

राजनांदगांव निवासी देवप्रकाश दादर पुलिस दूरसंचार केन्द्र, राजनांदगांव में पुलिस निरीक्षक (इंस्पेक्टर) दूरसंचार के पद पर पदस्थ थे. उनके सेवाकाल के दौरान वेतनवृद्धि की गणना गलत तरीके से किए जाने के आधार पर अधिक वेतन भुगतान का हवाला देकर उनके विरूद्ध वसूली आदेश जारी किया. उक्त आदेश से क्षुब्ध होकर देवप्रकाश दादर द्वारा हाईकोर्ट अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं ऋषभदेव साहू के माध्यम से हाईकोर्ट बिलासपुर के समक्ष रिट याचिका दायर कर वसूली आदेश को चुनौती दी गई.

अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं ऋषभदेव साहू ने सुनवाई के दौरान पूर्व में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित न्यायदृष्टांत का हवाला देते हुए बताया कि किसी भी तृतीय श्रेणी शासकीय कर्मचारी से अधिक वेतन भुगतान का हवाला देकर वसूली नहीं की जा सकती है. इसके साथ किसी शासकीय कर्मचारी को वसूली दिनांक से यदि 5 वर्षों पूर्व गलत तरीके से वेतनवृद्धि जोड़कर अधिक वेतन भुगतान कर दिया गया है, इसके बावजूद भी उक्त शासकीय कर्मचारी को अधिक भुगतान की राशि की वसूली नहीं की जा सकती है.

उच्च न्यायालय ने याचिका को स्वीकार कर सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित न्यायदृष्टांतों के आधार पर याचिकाकर्ता पुलिस इंस्पेक्टर के विरूद्ध जारी वसूली आदेश को निरस्त कर एसपी दूरसंचार, भिलाई जोन को निर्देशित किया गया कि वे याचिकाकर्ता से वसूल की गई राशि का तत्काल भुगतान करें.

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