Home
🔍
Search
Videos
Stories
छत्तीसगढ़

“आधी-अधूरी जानकारी से कांग्रेस और मेरी छवि हुई धूमिल…”, पूर्व प्रवक्ता विकास तिवारी ने संचार विभाग प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला पर लगाया गंभीर आरोप

रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संचार विभाग के अधिकृत व्हाट्सऐप ग्रुप के दुरुपयोग को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। पूर्व प्रदेश प्रवक्ता एवं कांग्रेस नेता विकास तिवारी ने प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के चेयरमैन सुशील आनंद शुक्ला को एक कड़ा पत्र लिखते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। तिवारी ने आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ आधी-अधूरी और भ्रामक जानकारी मीडिया में प्रसारित कर उनकी राजनीतिक और सामाजिक छवि को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया गया है।

अपने पत्र में विकास तिवारी ने उल्लेख किया है कि 12 जनवरी 2026 की रात करीब 10 बजे छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अधिकृत व्हाट्सऐप ग्रुप “PCC MEDIA OFFICIAL 2026” में उनके राज्यसभा सांसद प्रतिनिधि पद से हटाए जाने से जुड़े पुराने पत्र साझा किए गए। यह ग्रुप प्रदेश और देश के 400 से अधिक पत्रकारों और पार्टी पदाधिकारियों से जुड़ा है, जिसका संचालन संचार विभाग द्वारा किया जाता है।

तिवारी का कहना है कि ग्रुप में जिन पत्रों को साझा किया गया, वे उनके निष्कासन से करीब तीन वर्ष और छह माह पूर्व के हैं। इसके बावजूद इन्हें मौजूदा संदर्भ में इस तरह प्रस्तुत किया गया, जिससे मीडिया में यह संदेश गया कि हाल ही में उन्हें राज्यसभा सांसद प्रतिनिधि पद से हटाया गया है। 13 जनवरी 2026 को दैनिक भास्कर सहित अन्य समाचार पत्रों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में इसी आधार पर खबरें प्रकाशित हुईं।

पत्र में यह भी कहा गया है कि इन दस्तावेजों को साझा करने से पहले न तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और न ही प्रभारी महामंत्री (संगठन एवं प्रशासन) मलकीत सिंह गेंदू से कोई विधिवत अनुमति ली गई। तिवारी ने मांग की है कि यदि अनुमति ली गई है तो उसके प्रमाण उन्हें उपलब्ध कराए जाएं।

विकास तिवारी ने इसे व्यक्तिगत राजनीतिक प्रतिशोध और बदले की भावना से प्रेरित कृत्य बताते हुए कहा है कि इससे न केवल उनकी व्यक्तिगत छवि को नुकसान पहुंचा है, बल्कि कांग्रेस पार्टी की भी छवि धूमिल हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी विचारधारा आज भी कांग्रेस की है और वे राहुल गांधी के प्रति अपनी निष्ठा बनाए हुए हैं।

पत्र में सुशील आनंद शुक्ला से तीन दिवस के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और लिखित स्पष्टीकरण देने की मांग की गई है। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई है कि तय समय-सीमा में जवाब नहीं मिलने की स्थिति में मानहानि का मामला माननीय न्यायालय में दायर किया जाएगा। तिवारी ने दावा किया है कि सभी प्रकाशित खबरों और व्हाट्सऐप ग्रुप से जुड़े साक्ष्यों को न्यायालय में प्रस्तुत करने के लिए सुरक्षित रखा गया है।

पूरे मामले को लेकर सुशील आनंद शुक्ला ने दिया ये बयान

विकास तिवारी के आरोप पर सुशील आनंद शुक्ला ने अपना स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि विकास तिवारी पर अनुशासन की कार्यवाही और कांग्रेस से निष्कासन के बाद मीडिया की ओर से यह सवाल पूछा जा रहा था कि वे इस निष्कासन के बाद भी कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य रंजीता रंजन के प्रतिनिधि है या नहीं। इस संबंध में जब पीसीसी की ओर से सांसद महोदया से जानकारी मांगी गई तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके द्वारा विकास तिवारी को पहले ही प्रतिनिधि के पद से हटा दिया गया है। इस संबंध में उन्होंने उनकी ओर से पूर्व जारी पत्र को पीसीसी को भेजा है। जिसे मूलतः मीडिया ग्रुप में मीडिया को सूचनार्थ प्रेषित किया गया।

इस पूरे मामले ने प्रदेश कांग्रेस के भीतर संचार व्यवस्था और मीडिया प्रबंधन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि पार्टी नेतृत्व और संबंधित पदाधिकारी इस विवाद पर क्या रुख अपनाते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button