रक्षा बंधन पर 95 साल बाद बन रहा अद्भुत संयोग, इस समय राखी बांधने से मिलेगा दोगुना फल
9 अगस्त को राखी, बहनें जरूर जाने, कब बांधे राखी

डेस्क रिपोर्टर, 06 अगस्त 2025/ इस वर्ष रक्षाबंधन पर्व पर ऋषिकेश पंचांग के अनुसार दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो 95 वर्षों बाद आया है. श्रावण पूर्णिमा तिथि इस बार आठ अगस्त की दोपहर 1:42 बजे से प्रारंभ होकर नौ अगस्त की दोपहर 1:23 बजे तक रहेगी. हालांकि पूर्णिमा के साथ ही भद्राकाल भी लग रहा है, जो नौ अगस्त की रात 1:52 बजे तक रहेगा. इसलिए रक्षाबंधन का पर्व नौ अगस्त को सूर्योदय के बाद मनाना शुभ माना गया है. ज्योतिषाचार्य के अनुसार 9 अगस्त की सुबह 5:45 से दोपहर 1:23 बजे तक राखी बांधना अत्यंत शुभ रहेगा. इस अवधि में भद्रा समाप्त हो चुकी होगी और पूर्णिमा भी विद्यमान रहेगी. इस वर्ष रक्षाबंधन पर सौभाग्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और श्रवण नक्षत्र का एक साथ पड़ना पर्व को अत्यंत विशिष्ट बनाता है. ऐसा संयोग वर्ष 1930 के बाद पहली बार बन रहा है. साथ ही श्रावण शुक्ल पक्ष के 16 दिन पूर्ण होने से इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, यदि रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाई को वैदिक विधि से रक्षा-सूत्र बांधें, तो उसकी रक्षा स्वयं भगवान विष्णु करते हैं. एक लाल कपड़े में थोड़े से अक्षत (चावल) और पीली सरसों रखकर पोटली बनायी जाती है. इसे मौली से बांधकर गंगाजल से शुद्ध किया जाता है. फिर इसे भगवान श्रीहरि विष्णु के इस मंत्र से अभिमंत्रित किया जाता है.
शान्ताकारं भुजंगशयनं पद्मनाभं सुरेशं। विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्॥ लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्। वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
इसके पश्चात यह रक्षा-सूत्र भाई के दाहिने हाथ में बांधा जाता है.
राखी बांधते समय बहनें तीन गांठें लगाती हैं, जो त्रिदेवों ब्रह्मा, विष्णु और महेश को समर्पित होती है. पहली गांठ भाई के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए. दूसरी गांठ बहन की लंबी उम्र और उसके परिवार की सुख-समृद्धि. तीसरी गांठ भाई-बहन के रिश्ते में अटूट प्रेम और दृढ़ता के लिए होती है.
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