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छत्तीसगढ़

महिलाओं को रजिस्ट्री में 30 हजार की बचत, महज 30 मिनट में पूरा हुआ पंजीयन

रायपुर। कभी संपत्ति की रजिस्ट्री के लिए घंटों इंतजार और अधिक खर्च की चिंता रहती थी, लेकिन अब पंजीयन व्यवस्था में किए गए सुधारों से नागरिकों के समय और धन दोनों की बचत हो रही है। राजनांदगांव की नम्रता खंडेलवाल और प्रिया खंडेलवाल ने इस बदलाव को स्वयं महसूस किया। संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पहुंचीं दोनों महिलाओं को पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत और 0.6 प्रतिशत उपकर समाप्त होने से कुल करीब 30 हजार रुपये की आर्थिक राहत मिली। वहीं, उप-पंजीयक कार्यालय में पंजीयन की पूरी प्रक्रिया महज 30 मिनट में पूरी हो गई। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में दोनों महिलाओं ने इस सुखद अनुभव को साझा किया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के विजन के अनुरूप वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए विभिन्न सुधार किए गए हैं। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर शुल्क में रियायत, उपकर की समाप्ति और तकनीक आधारित सुविधाओं के विस्तार से नागरिकों को प्रत्यक्ष आर्थिक राहत मिलने के साथ रजिस्ट्री की प्रक्रिया भी आसान हुई है।

रजिस्ट्री में 30 हजार रुपये की बचत, दोनों महिलाओं के चेहरे पर आई खुशी

नम्रता खंडेलवाल और प्रिया खंडेलवाल ने बताया कि महिला क्रेता होने के कारण उन्हें पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत मिली। महिलाओं के पक्ष में संपत्ति अंतरण संबंधी दस्तावेजों पर पंजीयन शुल्क की दर 4 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत की गई है। इसके साथ ही राज्य शासन द्वारा 0.6 प्रतिशत उपकर समाप्त किए जाने का लाभ भी उन्हें मिला।

इन दोनों रियायतों के कारण संपत्ति पंजीयन पर होने वाला कुल खर्च कम हुआ और उन्हें करीब 30 हजार रुपये की बचत हुई। दोनों महिलाओं ने इस आर्थिक राहत को उपयोगी बताते हुए कहा कि शुल्क में कमी से अपने नाम संपत्ति की रजिस्ट्री कराना अधिक किफायती हुआ है।

प्रिया ने बताया—सिर्फ 30 मिनट में पूरा हो गया रजिस्ट्री का कार्य

प्रिया खंडेलवाल ने पंजीयन प्रक्रिया में आए बदलाव के अनुभव साझा करते हुए बताया कि उप-पंजीयक कार्यालय में उनकी रजिस्ट्री और उससे संबंधित प्रक्रिया लगभग 30 मिनट में पूरी हो गई। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, डिजिटल भुगतान और तकनीक आधारित अन्य सुविधाओं के कारण उन्हें पंजीयन कराने में आसानी हुई।

उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था में प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल और सुविधाजनक हुई है। कम समय में काम पूरा होने से अनावश्यक इंतजार और कार्यालयीन दौड़भाग से भी राहत मिली।

डिजिटल सुविधाओं से रजिस्ट्री हुई आसान, नामांतरण की प्रक्रिया भी हुई सरल

पंजीयन विभाग द्वारा तकनीक आधारित सुधारों के माध्यम से संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाया जा रहा है। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट से नागरिक अपनी सुविधा के अनुसार पंजीयन के लिए समय निर्धारित कर सकते हैं। वहीं, ऑनलाइन भुगतान की सुविधा से पंजीयन शुल्क का भुगतान डिजिटल माध्यम से किया जा सकता है। इसके साथ ही आधार आधारित पहचान सत्यापन और डिजिटल दस्तावेज जैसी व्यवस्थाओं से पंजीयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिल रही है।

ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था के तहत संपत्ति की रजिस्ट्री होने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ती है। इससे नागरिकों को नामांतरण के लिए अलग से आवेदन और संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम हो रही है।

महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को मिल रहा प्रोत्साहन

राज्य शासन द्वारा महिलाओं के लिए पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत से संपत्ति पंजीयन का आर्थिक भार कम हुआ है। यह पहल महिलाओं के नाम संपत्ति खरीदने और उसका विधिवत पंजीयन कराने को प्रोत्साहित कर रही है। संपत्ति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना उनकी आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।

नम्रता खंडेलवाल और प्रिया खंडेलवाल को मिली करीब 30 हजार रुपये की आर्थिक राहत इसी व्यवस्था का प्रत्यक्ष उदाहरण है। शुल्क में छूट के साथ कम समय में रजिस्ट्री पूरी होने से दोनों महिलाओं को दोहरा लाभ मिला।

नम्रता और प्रिया की कहानी—सुशासन से मिली दोहरी राहत

नम्रता खंडेलवाल और प्रिया खंडेलवाल ने पंजीयन शुल्क में रियायत तथा डिजिटल सुविधाओं से मिले लाभ के लिए छत्तीसगढ़ शासन और पंजीयन विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शुल्क में राहत और कम समय में पंजीयन की सुविधा से उनका अनुभव पहले की तुलना में बेहतर रहा।

‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से पंजीयन विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर सुधारों के जमीनी प्रभाव, अनुभव और सुझाव संकलित कर रहा है।

राजनांदगांव की नम्रता और प्रिया की यह कहानी बताती है कि नागरिक सेवाओं में किए गए सुधारों का वास्तविक महत्व तब सामने आता है, जब उनका लाभ सीधे आम लोगों तक पहुंचता है। महज 30 मिनट में रजिस्ट्री और करीब 30 हजार रुपये की आर्थिक बचत उनके लिए केवल प्रशासनिक सुधार का परिणाम नहीं, बल्कि समय, धन और अनावश्यक परेशानी से मिली राहत का अनुभव है।

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