Home
🔍
Search
Videos
Stories
छत्तीसगढ़छत्तीसगढ़ जनसंपर्क

समान नागरिक संहिता पर रायशुमारी के लिए विभिन्न संगठनों व सामाजिक प्रतिनिधियों से की गई चर्चा

रायपुर। समान नागरिक संहिता के क्रियान्वयन के पूर्व राज्य स्तर पर गठित उच्च स्तरीय समिति द्वारा विस्तृत चर्चा एवं सुझाव के लिए दो दिवसीय बैठक 10 सितंबर से आयोजित की गई, जिसमें भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी एवं समिति के सदस्य एम. के. राउत की अध्यक्षता में पीपीटी के माध्यम से समान नागरिक संहिता के वर्तमान नियमों एवं कानूनों की जानकारी दी गई। इस अवसर पर समिति के सदस्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार उपस्थित थे।

पुराना सर्किट हाउस के सभाकक्ष में छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर गठित राज्य स्तरीय समिति द्वारा आयोजित दो दिवसीय परामर्श बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस दौरान समिति के सदस्यों ने विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और राज्य आयोगों के प्रमुखों के साथ विस्तारपूर्वक चर्चा की। दो दिनों तक चले इस गहन मंथन सत्र के दौरान मुख्य रूप से विवाह और तलाक, उत्तराधिकार और विरासत, भरण-पोषण तथा लिव-इन रिलेशनशिप जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषयों पर सभी पक्षों से खुलकर सुझाव लिए गए।

इस दौरान गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति के प्रांतीय सचिव गजानंद नुरूटी ने आदिवासी समाज की रूढ़िगत परंपराओं और विशिष्ट सांस्कृतिक ताने-बाने की रक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आदिवासी समुदाय की मौलिक पहचान और अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें समान नागरिक संहिता के दायरे से पृथक रखने का औपचारिक अनुरोध किया। वहीं, दूसरी ओर राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा ने समाज में लैंगिक समानता की पुरजोर वकालत की। उन्होंने महिला एवं पुरुष को समान अधिकार देने, बेटे और बेटी को संपत्ति में बराबर का उत्तराधिकार सौंपने, विवाह एवं तलाक का अनिवार्य पंजीयन कराने तथा संपत्ति व वसीयत से जुड़े स्पष्ट कानूनी प्रावधान स्थापित करने की दिशा में ठोस प्रयास करने का सुझाव दिया। क्रिश्चन समाज के राजेश जॉन पाल सहित समाज के आए प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव में कहा कि विवाह को ईश्वर के द्वारा बनाई गई अटूट जोड़ी मानी जाती है, जिसे तोड़ा नहीं जा सकता। लिव-इन संबंध को समाज द्वारा स्वीकार नहीं किया जा सकता।

इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा भी उपस्थित रहीं और उन्होंने बच्चों के अधिकारों एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। ​समिति के सदस्यों ने सभी प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत किए गए सुझावों को बेहद गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना। उन्होंने आश्वस्त किया कि विभिन्न सामाजिक समूहों से प्राप्त इन सभी महत्वपूर्ण व्यावहारिक तथ्यों और सुझावों का गहराई से विश्लेषण किया जाएगा, ताकि एक समावेशी, संतुलित और निष्पक्ष मसौदा तैयार किया जा सके।

बैठक में अधिवक्ता संघ के वरिष्ठ अधिवक्ता बृजेश पांडेय, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष दिनेश देवांगन, अधिवक्ता परिषद के अध्यक्ष प्रमोद तिवारी तथा वरिष्ठ उपाध्यक्ष भारती राठौर ने समान नागरिक संहिता के प्रावधानों को अधिक कारगर, स्पष्ट व पारदर्शी बनाने पर जोर देते हुए अपने सुझाव प्रस्तुत किए। चर्चा बैठक के द्वितीय सत्र में कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष डॉ. सुरेश मिश्रा तथा आशीष बाजपेयी ने समान नागरिक संहिता पर अपने विचार एवं अभिमत समिति के समक्ष दर्ज कराया। इसी प्रकार मेडिकल एसोसिएशन के प्रतिनिधि डॉ. कुलदीप सोलंकी, डॉ. सुरभि दुबे तथा डॉ. के.पी. आजमानी ने समान नागरिक संहिता के क्रियान्वयन के संबंध में अपनी राय दी तथा उच्च स्तरीय समिति के सदस्यों को सुझाव दिए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button