पंचायतों में प्राकृतिक स्त्रोतों विशेषकर तालाबों को संरक्षित एवं सुरक्षित रखें: एसीएस ऋचा शर्मा

रायपुर। जिला पंचायत रायपुर द्वारा ठाकुर प्यारेलाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान निमोरा में जिले के सरपंचों का एक दिवसीय पंचायत सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसका विषय ”प्राकृतिक सामुदायिक संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रबंधन में पंचायतों की संरक्षक के रूप में भूमिका“ थी। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अतिरिक्त मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, विशिष्ट अतिथि के रूप में कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह एवं जिला पंचायत सीईओ कुमार बिश्वरंजन शामिल हुए।

अतिरिक्त मुख्य सचिव ऋचा शर्मा ने कहा कि पंच सरपंचों के लिए ऐसी कार्यशाला सराहनीय है। हमारा जो जीवन है हमारे गांव की प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ा हुआ है इसे संरक्षित करना और बचाए रखना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हमारे गांव में जो पानी के स्त्रोत हैं उसे अवश्य स्वच्छ रखें। इससे हमें स्वच्छ पेयजल मिलेगा साथ ही आने वाली पीढ़ियों के लिए भी यह पूंजी है। गांव में यह देखा जाता हे कि पेयजल लाने की जिम्मेदारी गांव की महिलाओं पर होती है और आसपास पानी नहीं होने पर उन्हें दूर जाना पड़ता है, तकलीफों का सामना करना पड़ता है इसलिए उनकी समस्या को देखते हुए अपने गांव के तालाबों को स्वच्छ रखें। उन्होंने आग्रह किया कि सभी तालाबोें को मछली पालन जैसे व्यवसायिक उपयोग के लिए न प्रयोग करें, कुछ तालाब पेयजल, निस्तारी के लिए भी रखें।
श्रीमती शर्मा ने कहा कि ग्रामसभा और पंचायती राज अधिनियम में सरपंचों को विशेष अधिकार दिए गए हैं। उन अधिकारों के बारे में जानें क्योंकि गांव में विकास करने के लिए संसाधन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि 16वें वित्त आयोग से पंचायतों में कचरे के रिसायकल के लिए एवं नल जल योजना के लिए विशेष प्रावधान किया गया हे इसका विशेष उपयोग करें।
कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा कि आज एक अच्छा अवसर था जब सरपंच अपने कामों का प्रस्तुतिकरण देते रहे और सारे वरिष्ठ अधिकारी उन्हें सुनते रहे। कलेक्टर ने कहा सभी सरपंच अच्छा काम कर रहे है, क्योंकि उनके द्वारा प्राकृतिक सामुदायिक संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रबंधन के लिए कार्य किए जा रहे हैं। डॉ. सिंह ने कहा कि सरपंच अपने गांव को अपना घर समझकर कार्य करें तो उस गांव का समुचित विकास होगा। उन्होंने कहा वीबी जी राम जी के आने के बाद यह सभी ग्राम पंचायत के लिए सुनहरा अवसर है। इसके तहत जिले के 409 ग्राम पंचायत में विद्यालयों मे बालक-बालिका का मॉडल शौचालय बनाया जाएगा। साथ ही आवश्यकतानुसार किचन शेड भी बनाया जाएगा। कलेक्टर ने कहा कि प्राकृतिक स्त्रोतों की सुरक्षित रखते हुए हम सब मिलकर बेहतर गांव बनाएंगे।
जिला पंचायत सीईओ बिश्वरंजन ने कहा कि जिले के कुछ पंचायतों में प्राकृतिक स्त्रोतों को सुरक्षित रखने के लिए अच्छा कार्य किया जा रहा है। कार्यशाला में सरपंचों ने बताया गया कि उनके द्वारा अवैध अतिक्रमण को हटाया गया और मुक्त कराई गई जमीन का सदुपयोग भी किया जा रहा है। श्री बिश्वरंजन ने कहा कि तालाबों को गहरीकरण या सीमेंटीकरण करने से उनका संरक्षण नहीं होता कई बार अत्यधिक गहरीकरण से तलहटी में छोटे पौधे का विकास नहीं हो पाता जो कि छोटी मछलियों का भोजन होते हैं अतः तालाबों के संरक्षण के लिए विशेष कार्य योजना बनानी चाहिए।
कार्यक्रम में सरपंचों ने अपने क्षेत्र में किए गए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए किए गए कार्याें की जानकारी दी।




