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छत्तीसगढ़

600 वर्ष पुराने ऐतिहासिक गोंचा महापर्व में बिखरा भक्ति का रंग, पद्मश्री अनुज शर्मा के भजनों से सराबोर हुआ जगदलपुर

जगदलपुर। जगदलपुर के सुप्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर परिसर में 600 वर्षों से अधिक प्राचीन एवं ऐतिहासिक ‘गोंचा महापर्व’ के उपलक्ष्य में आयोजित भव्य सांस्कृतिक संध्या अपार उत्साह और श्रद्धा के साथ संपन्न हुई। इस गौरवशाली एवं गरिमामयी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं क्षेत्रीय विधायक किरण सिंह देव विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनके साथ 360 घर अरण्य ब्राह्मण समाज (बस्तर संभाग) के समस्त आयोजकगण एवं पदाधिकारी भी मंच साझा करते नजर आए। कार्यक्रम में बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और सदियों पुरानी परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्री जगन्नाथ स्वामी जी के दर्शन और भव्य भजन संध्या का आनंद लेने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु जन उपस्थित रहे।

विशेष आरती और दीप प्रज्ज्वलन से शुरुआत

सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ भगवान श्री जगन्नाथ जी की विशेष आरती और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय सुपरस्टार पद्मश्री अनुज शर्मा ने अपनी सुमधुर आवाज में भजनों की एक से बढ़कर एक मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। उन्होंने अपनी सुरीली आवाज से वहां मौजूद विशाल जनसमूह का दिल जीत लिया। उनकी भक्तिमयी व सुरमयी प्रस्तुति ने ऐसा समां बांधा कि प्रांगण में मौजूद हज़ारों श्रद्धालु झूमने पर मजबूर हो गए। देर रात तक तालियों की गड़गड़ाहट और प्रभु के जयकारों के बीच पूरा जगदलपुर शहर भगवान जगन्नाथ की भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया।

गोंचा महापर्व बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर और सामूहिक एकता का आधार: किरण सिंह देव

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अपार जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि किरण सिंह देव ने कहा, “गोंचा महापर्व केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, सामूहिक एकता और हमारी पहचान का आधार है। सदियों पुरानी इस गौरवशाली परंपरा को आज की युवा पीढ़ी जिस उत्साह के साथ आगे बढ़ा रही है, वह वास्तव में प्रशंसनीय है।” उन्होंने अनुज शर्मा की प्रशंसा करते हुए कहा, “पद्मश्री अनुज शर्मा की इस संगीतमय प्रस्तुति ने इस महापर्व की दिव्यता को और अधिक बढ़ा दिया है। छत्तीसगढ़ की माटी के इस लाल ने अपने भजनों से न केवल समां बाँधा, बल्कि बस्तर की पावन धरा को भक्ति रस से सराबोर कर इस सांस्कृतिक संध्या को हमेशा के लिए यादगार बना दिया है।”

प्रभु जगन्नाथ जी के चरणों में भजन अर्पित करना मेरा सौभाग्य: अनुज शर्मा

भजन संध्या के मंच से बस्तरवासियों और श्रद्धालुओं का आभार जताते हुए पद्मश्री अनुज शर्मा ने कहा, “बस्तर का गोंचा महापर्व केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमारी 600 वर्षों से भी अधिक प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर, अटूट आस्था और समृद्ध परंपरा का जीवंत प्रतीक है। बस्तर की यह पावन भूमि कला, संस्कृति और भक्ति का अनूठा संगम है, जहाँ का हर कण प्रभु जगन्नाथ के रंग में रंगा हुआ है।” उन्होंने आगे कहा, “600 से अधिक वर्षों की इस निरंतर जीवंत ‘गोंचा परंपरा’ में प्रभु श्री जगन्नाथ जी के चरणों में भजन अर्पित करना मेरे लिए सौभाग्य और असीम शांति का क्षण है। बस्तर की जनता का यह अपार स्नेह और भक्ति भाव अद्भुत है। मैं हमारे प्रदेश अध्यक्ष जी का हृदय से आभार व्यक्त करना चाहूँगा, जिन्होंने मुझे इस ऐतिहासिक पर्व का हिस्सा बनाया।”

पद्मश्री अनुज शर्मा का भव्य अभिनंदन एवं आभार

आयोजक समिति के प्रतिनिधियों ने बताया कि गोंचा महापर्व बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। इस वर्ष की भव्य सांस्कृतिक संध्या ने इस महापर्व की गरिमा को और अधिक ऊँचाइयों पर पहुँचा दिया है। समारोह के अंत में आयोजन समिति, 360 घर अरण्य ब्राह्मण समाज के पदाधिकारियों एवं स्थानीय जन-प्रतिनिधियों द्वारा पद्मश्री अनुज शर्मा को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया तथा इस अद्भुत एवं अविस्मरणीय प्रस्तुति के लिए उनका हृदय से आभार व्यक्त किया गया। इस सांस्कृतिक संध्या में बस्तर के हजारों श्रद्धालु और प्रबुद्ध नागरिक देर रात तक उपस्थित रहे और भजनों पर झूमकर अपनी अपार श्रद्धा प्रकट की।

 

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