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छत्तीसगढ़

विशेष आवश्यकता वाले बच्चे को मिली नई दिशा, समावेशी शिक्षा योजना का असर

समग्र शिक्षा की पहल रंग लाई, तनुज के जीवन में आया उल्लेखनीय सुधार

रायपुर। समग्र शिक्षा के अंतर्गत संचालित समावेशी शिक्षा योजना के माध्यम से विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास लगातार सार्थक परिणाम दे रहे हैं। रायपुर जिले के शासकीय प्राथमिक शाला, अवंति विहार के कक्षा तीसरी के छात्र 8 वर्षीय तनुज के जीवन में इस योजना के तहत उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।

सेरेब्रल पाल्सी से ग्रसित तनुज के हाथों की मांसपेशियों में अत्यधिक अकड़न होने के कारण उसके दोनों हाथ अंदर की ओर मुड़े रहते थे। वह न तो स्वयं भोजन कर पाता था और न ही किसी वस्तु को ठीक से पकड़ पाता था, जिससे लिखने में भी कठिनाई होती थी। इसके अलावा पैरों और घुटनों में कमजोरी के कारण उसका चलना भी असंतुलित था।

विकासखंड स्रोत केंद्र समन्वयक (शहरी) महिमा जोसेफ द्वारा निरीक्षण के दौरान तनुज की पहचान की गई। इसके बाद जिला चिकित्सालय रायपुर में परीक्षण कराकर उसे फिजियोथेरेपी और काउंसलिंग की सलाह दी गई। रिसोर्स रूम में विशेष शिक्षक डॉ. गार्गी पाण्डेय द्वारा काउंसलिंग तथा फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. लावन्या द्वारा नियमित थेरेपी प्रदान की गई।

नियमित फिजियोथेरेपी और काउंसलिंग के परिणामस्वरूप तनुज की मांसपेशियों की अकड़न में कमी आई है। अब वह अपने हाथों को सीधा रख पा रहा है, स्वयं भोजन कर रहा है तथा लिखने में भी सक्षम हो गया है। साथ ही, उसके चलने-फिरने की क्षमता में भी सुधार हुआ है।

तनुज की माता लिलेश्वरी साहू ने बताया कि पहले उनके बेटे को चलने और वस्तुएं पकड़ने में काफी परेशानी होती थी, लेकिन अब सप्ताह में पांच दिन मिल रही फिजियोथेरेपी से उसमें तेजी से सुधार हुआ है। उन्होंने इसके लिए शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

समग्र शिक्षा के अंतर्गत समावेशी शिक्षा योजना का उद्देश्य 6 से 18 वर्ष के विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराकर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है। जिले में इस दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे ऐसे बच्चों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है।

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