Home
🔍
Search
Videos
Stories
छत्तीसगढ़

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की आपराधिक अपील को किया खारिज, कहा- लिमिटेशन कानून का करना होगा पालन

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में राज्य शासन द्वारा दायर आपराधिक अपील को केवल देरी के आधार पर खारिज कर दिया. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि विभागीय प्रक्रिया का हवाला देकर लंबी देरी को उचित नहीं ठहराया जा सकता. इस मामले में राज्य शासन ने कोरबा के विशेष न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें आरोपी संजय कुमार यादव (34 वर्ष) को आरोपों से मुक्त (डिस्चार्ज) कर दिया गया था. यह आदेश 15 अप्रैल को विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट), कोरबा द्वारा पारित किया गया था.

क्या था मामला

प्रकरण में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 296 तथा एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(आर) व 3(1)(एस) के तहत अपराध दर्ज था. यह मामला कोरबा जिले के अजाक थाना में दर्ज अपराध से संबंधित है. विशेष न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपी को आरोपों से मुक्त कर दिया था, जिसके खिलाफ राज्य ने हाईकोर्ट में अपील दायर की.

108 दिन की देरी बनी वजह

राज्य की ओर से दायर अपील में 108 दिन की देरी हुई थी. राज्य के वकील ने तर्क दिया कि फाइल प्रक्रिया, विधि एवं विधायी कार्य विभाग से अनुमोदन, तथा महाधिवक्ता से राय लेने में समय लगने के कारण देरी हुई, जो जानबूझकर नहीं थी. मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति संजय कुमार जायसवाल ने कहा कि, केवल विभागीय प्रक्रिया का हवाला देकर देरी को माफ नहीं किया जा सकता. राज्य को भी लिमिटेशन कानून का पालन करना होगा. सरकारी अधिकारियों की लापरवाही या ढिलाई को उचित कारण नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि राज्य को किसी प्रकार की विशेष छूट नहीं दी जा सकती. हाईकोर्ट ने स्टेट ऑफ मध्यप्रदेश बनाम रामकुमार चाैधरी (2024) मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी अत्यधिक देरी पर सख्त रुख अपनाया है और 1788 दिनों की देरी वाली अपील को खारिज कर दिया था. इन सभी तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने देरी माफी आवेदन को खारिज कर दिया. इसके साथ ही मुख्य आपराधिक अपील भी स्वतः खारिज हो गई.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button