आने वाला समय होगा एजीआई का समय, शिक्षक एआई की मदद से कम समय में बेहतर कंटेंट बनाएंगे: संजय जैन

रायपुर। अब रायपुर जिले के शिक्षक हाईटेक होने जा रहे हैं। शिक्षक एआई टूल्स जैसे तकनीक से अपने टीचिंग को अपडेट करेंगे। इसके लिए जिले में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “एआई सक्षम शिक्षक अभियान” की शुरुआत की गई है। न्यू सर्किट हाउस में हुए इस कार्यशाला में 200 से अधिक मास्टर ट्रेनर बने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग से शिक्षण को प्रभावी बनाने के विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्राप्त की।
इस अवसर पर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह की उपस्थिति में जिला शिक्षा अधिकारी हिमांशु भारती और गूगल एजुकेशन ऑफ इंडिया के हेड संजय जैन एवं गूगल इंडिया के पब्लिक पॉलिसी हेड राजेश रंजन के मध्य एलओआई हुआ। जिससे आने वाले समय में जिले के करीब 10 हजार शिक्षकों को निःशुल्क ट्रेनिंग दी जाएगी। गूगल के अधिकारियों ने बताया कि रायपुर जिले के साथ साथ प्रदेश के शिक्षकों को भी एआई टूल्स का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इस अवसर पर गूगल एजुकेशन ऑफ इंडिया के हेड संजय जैन ने बताया कि एआई के माध्यम से बच्चे बिना किसी झिझक के सवाल पूछ सकते हैं, जिससे उनकी जिज्ञासा और सीखने की क्षमता बढ़ती है। उन्होंने कहा कि एआई टूल्स की मदद से आसानी से वीडियो कंटेंट तैयार किया जा सकता है, जो बच्चों को विषयों को बेहतर तरीके से समझने में सहायक होगा। श्री जैन ने प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग के बारे में बताते हुए कहा कि यह way of talk to AI है जिससे हम एआई का अधिक बेहतर तरीके से उपयोग कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि आने वाला समय एआई से भी आगे एजीआई (AGI) का दौर होगा जिसमें गूगल काम कर रहा है, जो ह्यूमन इंटेलीजेेंस की तरह होगा। उन्होंने बताया कि Google ने शिक्षकों के लिएGenerative AI for Educators with Gemini नामक एक कोर्स भी शुरू किया है, जो उन्हें एआई के माध्यम से शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए प्रशिक्षित करता है।
श्री रंजन ने एआई के बार में जानकारी देते हुए कहा कि एआई की मदद से कोई शिक्षक अपनी शैक्षणिक क्षमता को बढ़ा सकता है। हर विद्यार्थी की समझने की क्षमता अलग-अलग होती है जैसे कोई ऑडियो रूप में या वीडियो के रूप में। आज के सीमित समय में इन सभी माध्यम में एक साथ काम करना मुश्किल है लेकिन अब एआई को कमाण्ड देकर किसी भी क्लास के लिए वीडियो या अन्य शैक्षणिक सामग्री बना सकते हैं। इस अभियान के तहत शिक्षक एआई टूल्स का उपयोग बेहतर तरीके से कर सकते हैं और उसके दुष्परिणाम के बारे में बच्चों को सचेत भी कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि Google AI, Chat GPT और NotebookLM जैसे टूल्स के माध्यम से शिक्षक अपने छात्रों को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं और उनकी आवश्यकताओं के अनुसार शिक्षा प्रदान कर सकते हैं।

कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा कि अब हर कक्षा में नवाचार की बात होगी और गूगल के साथ मिलकर सीखने की नई शुरुआत की जा रही है। उन्होंने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि जब शिक्षक तकनीक से सशक्त होंगे, तभी विकसित भारत की नींव गांवों में मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि एआई विद्यार्थियों के लिए रिविजन और लर्निंग का प्रभावी माध्यम बनेगा तथा शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। आज का समय तकनीक का युग है। इस बदलते युग में आप जितने अपडेट होंगे उतनी कार्यक्षमता बढ़ेगी। एआई जैसे टूल्स का उपयोग बच्चे भी करने लगे हैं तो यह शिक्षकों के लिए यह कार्यशाला सर्थक सिद्ध होगी। इस कार्यशाला को पूरा करने पर शिक्षकों को गूगल का प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा, जिससे उन्हें गूगल के कई कोर्सेस करने की सुविधा मिल सकती है।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कुमार बिश्वरंजन ने कहा कि एआई आज शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है और विद्यार्थी भी इसका उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस कार्यशाला के लिए गूगल से विशेषज्ञों का मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है।

जिला शिक्षा अधिकारी हिमांशु भारती ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जिले को इस अभियान की शुरुआत का पहला अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला के माध्यम से शिक्षकों ने एआई के विभिन्न आयामों को समझा है, जिसे वे विद्यालयों में विद्यार्थियों तक पहुंचाएंगे।
इस अवसर पर नगर निगम आयुक्त विश्वदीप, डीएमसी अरुण कुमार शर्मा, मेट्री एआई के फाउंडर रोहित कश्यप सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।




