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नई शिक्षा नीति पर सदन में घिरे शिक्षा मंत्री, बोले—छत्तीसगढ़ में अभी पूरी तरह लागू नहीं

रायपुर। नई शिक्षा नीति-2020 को लागू हुए 6 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ में अभी भी यह नीति पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया है. फिर चाहे वह मातृभाषा में शिक्षा देने का हो या फिर प्रत्येक स्कूल में छात्रों के अनुपात में शिक्षकों की नियुक्ति का हो या फिर गुणवत्तायुक्त शिक्षा का हो. आज सदन में ध्यानाकर्षण के दौरान विपक्ष ने नई शिक्षा नीति के पालन को लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री को घेरा.

कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि राज्य में नई शिक्षा नीति का पालन सही ढंग से नहीं हुआ, नहीं हो रहा है. राघवेंद्र सिंह ने सवाल किया कि क्या शिक्षा नीति के तहत छात्रों के अनुपात में सभी स्कूलों में शिक्षक हैं? इस सवाल के जवाब में मंत्री गजेंद्र यादव घिर गए. उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में 22 छात्रों में एक शिक्षक की व्यवस्था की गई है. छत्तीसगढ़ में युक्तियुक्तकरण के तहत आज औसत 19 छात्रों में एक शिक्षक हैं.

हालांकि, मंत्री यह नहीं बता पाए कि ऐसी व्यवस्था सभी स्कूलों में है. और उन्होंने स्वीकर किया कि अभी सभी स्कूलों तक नई शिक्षा नीति पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है. वहीं उन्होंने यह भी कहा कि इसके पीछे युक्तियुक्तकरण की प्रकिया पूरी नहीं होना है. इसके चलते कई स्कूलों में शिक्षकों की व्यवस्था शेष में है. क्योंकि कुछ लोग कोर्ट में गए हुए है.

वहीं उन्होंने राघवेंद्र सिंह के ही सवाल- स्कूलों को मर्ज करने और यूडाइस कोड समाप्त होने पर कहा कि विभाग की ओर से अलग-अलग यूडाइस कोड की जगह एक ही कोड रखने और अन्य को समाप्त करने की अनुशंसा केंद्र सरकार को भेजी गई है.

वहीं उन्होंने नेता-प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत और कांग्रेस विधायल शेषराज हरबंश के सवाल पर कहा कि अभी प्रदेश में कहीं भी सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी की व्यवस्था में नहीं. नई शिक्षा नीति में भी 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चे के लिए आंगनबाड़ी और बालवाड़ी की व्यवस्था है. प्रदेश में 11 हजार बालवाड़ी स्वीकृत किए गए हैं.

चर्चा के दौरान शेषराज हरबंश ने कहा कि छत्तीसगढ़ में हजारों स्कूलों को बंद कर दिया गया है. जांजगीर जिले में ही सैकड़ों स्कूल शामिल है. मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि स्कूल बंद नहीं किए गए हैं. स्कूलों को मर्ज किया गया है. प्रदेश में अब 87 प्रतिशत स्कूल एक ही परिसर में संचालित हैं. इसके लिए ही प्राचार्य की व्यवस्था की गई है. बाकी पद सब वही है. कहीं स्कूल बंद नहीं हुआ है. अलग-अलग स्कूलों को एक ही जगह पर समायोजित किया गया है.

वहीं नेता-प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि आज गाँव-गाँव में प्राइवेट स्कूल खुल रहे हैं. सरकारी स्कूलों की स्थिति अच्छी नहीं है. इस पर मंत्री ने कहा कि यह सही है कि गाँव-गाँव प्राइवेट स्कूल खुल रहे हैं. 7 हजार से अधिक निजी स्कूल खुल गए हैं. इसके कारण क्या है ? इसकी समीक्षा करेंगे. सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता को ठीक करेंगे. हमारी कोशिश होगी कि निजी स्कूल के बच्चे वापस सरकारी स्कूल में लौट सकें.

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